आपने भी ली है LIC पॉलिसी तो जानिए सरकार के इस फैसले से क्या होगा असर

भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC)

LIC कर्मचारी संगठन ने मंगलवार को ‘वॉक आउट’ हड़ताल करने का फैसला लिया है. कर्मचारियों ने हड़ताल का यह फैसला LIC में आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के जरिए हिस्सेदारी बेचने के विरोध में किया हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated:
    February 4, 2020, 6:03 PM IST

नई दिल्ली. भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के कर्मचारी संगठन ने मंगलवार को एक घंटे ‘वॉक आउट’ हड़ताल करने का फैसला लिया है. कर्मचारियों ने हड़ताल का यह फैसला LIC में आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के जरिए हिस्सेदारी बेचने के विरोध में किया हैं. यह ‘वॉक आउट हड़ताल’ कंपनी के देशभर में स्थित सभी कार्यालयों में होगी. शनिवार को पेश किए गए बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने ऐलान किया था कि सरकार LIC को स्टॉक एक्सचेंज (Stock Exchange) पर लिस्ट करेगी. बजट में इस ऐलान के बाद ही बाजार से लेकर बीमाधारक तक LIC के भविष्य को लेकर चिंतित हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि एलआईसी के इस फैसले से बीमाधारकों पर क्या असर पड़ेगा और बाजार पर भी इसका क्या असर पड़ेगा.

मुसीबत में सरकार के काम आती है LIC
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, जुलाई 2019 तक LIC के पास कुल 31.11 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है. हर साल ​सरकारी सिक्योरिटी और स्टॉक मार्केट में भी LIC ही सबसे बड़ी निवेशक होती है. एक साल में स्टॉक मार्केट में LIC औसतन 55-65 हजार करोड़ रुपये का निवेश करती है.

भारतीय स्टॉक मार्केट में सबसे अधिक निवेश के लिहाज से भी LIC ही टॉप पर है. डिबेंचर्स और बॉन्ड्स में भी LIC ने भारी निवेश कर रखा है. यह आंकड़ा करीब 4,34,959 करोड़ रुपये का है. वित्त वर्ष 2017-18 की सालाना रिपोर्ट में एलआईसी ने जानकारी दी थी कि इन्फ्रास्ट्रक्चर फंडिंग में मार्च 2018 तक उसने 3,76,097 करोड़ रुपये खर्च किया है.

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आखिर क्यों LIC को लिस्ट करना चाहती है सरकार?वित्त वर्ष 2020-21 के लिए केंद्र सरकार ने विनिवेश (Disinvestment) लक्ष्य को लगभग दोगुना कर दिया है. चालू वित्त वर्ष के लिए ​रणनीतिक विनिवेश का लक्ष्य 65 हजार करोड़ रुपये रखा गया था. अब अगले वित्त वर्ष के लिए इसे बढ़ाकर 1.20 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है. चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार ने 1.05 लाख करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य तय किया था, जिसमें से सरकार को 18 हजार करोड़ रुपये हासिल करने में सफलता मिली है.

माना जा रहा है कि LIC का IPO देश का सबसे बड़ा IPO साबित हो सकता है. अगर सरकार LIC का IPO लेकर आती है तो उसके पास बड़े स्तर पर पूंजी आएगी और राजको​षीय घाटा (Fiscal Deficit) की भरपाई करने में मदद मिलेगी. बजट में सरकार ने राजकोषीय घाटे का अनुमान वर्तमान में GDP के 3.3 फीसदी से बढ़कार 3.8 फीसदी रखा है. अगले वित्त वर्ष के लिए यह अनुमान 3.5 फीसदी का है.

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आपने भी ली है LIC पॉलिसी तो क्या होगा असर?
वर्तमान में, भारत के तीन चौथाई बीमा बाजार पर LIC की पकड़ है. हालांकि, पिछले साल ही निवेश को लेकर LIC के कुछ गलत फैसलों पर सवाल भी उठाया गया था. अब सरकार द्वारा एलआईसी आईपीओ लाने के फैसले को लेकर माना जा रहा है कि एलआईसी की लिस्टिंग के बाद कंपनी के कामकाज में पहले से अधिक पारदर्शिता आएगी.

अगर कंपनी बेहतर प्रदशर्न करती है तो इसका लाभ बीमाधारकों पर भी होगा. जानकारों का कहना है कि LIC की अधिकतर पॉलिसी नॉन यूनिट लिंक है. इसका मतलब है कि अगर शेयर बाजार में काई उतार-चढ़ाव आता है तो इसका असर पॉलिसी पर नहीं देखने को मिलेगा. वहीं, कंपनी के बेहतर प्रदर्शन की असर लोगों के निवेश पर साकारात्मक रूप में देखने को मिलेगा.

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First published: February 4, 2020, 6:03 PM IST





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