नई दिल्ली. लगातार कई महीनों से केंद्र सरकार आर्थिक सुस्ती जैसे शब्द के इस्तेमाल से परहेज करते रही है. खासकर तब, जब GDP ग्रोथे रेट में भारी गिरावट देखने को मिल रही है. केंद्र सरकार अब नैरेटिव बदलकर ‘ग्रीन शूट्स’ की बात कर रही है. अर्थव्यवस्था के संदर्भ में ग्रीन शूट्स का मतलब आर्थिक रिकवरी होता है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) लोकसभा में आम बजट पर जवाब देते हुए ग्रीन शूट्स का जिक्र कर रही थीं. इसके बाद एक मीडिया सम्मेलन में भी उन्होंने इस बारे में जिक्र किया है. सरकार के बाद अब भारतीय रिजर्व बैंक ने भी हाल में खत्म हुए मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के बाद कहा है कि ग्रोथ में गिरावट का दौर अब खत्म हो चुका है.बीते मंगलवार को वित्त मंत्री ने लोकसभा में कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, फैक्ट्री उत्पादन, और पिछले तीन महीनों में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का GST कलेक्शन इस बात को दर्शाता है कि भारतीय ​अर्थव्यवस्था में अब रिकवरी देखने को मिल रही है. उन्होंने कहा, ‘वर्तमान में 7 ऐसे महत्वपूर्ण इंडिकेटर्स हैं, जिसके आधार पर कहा जा सकता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में रिकवरी देखने को मिल रही है. अर्थव्यवस्था संकट के दौर से नहीं गुजर रही है.’ वित्त मंत्री ने कहा कि फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व अपने उच्चतम स्तरर पर है और स्टॉक मार्केट में भी तेजी देखने को मिल रही है. उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस चार ग्रोथ इंजन पर है, जिसमें प्राइवेट इन्वेस्टमेंट, निर्यात और प्राइवेट व पब्लिक कंज्म्पशन शामिल है.यह भी पढ़ें: चीन के कोरोना वायरस की वजह से भारत में महंगी हो सकती हैं रोजमर्रा की ये चीजेंअपनी तरफ से आरबीआई ने ट्रैक्टर्स की ब्रिकी का हवाला (लगातार 10 महीनों की गिरावट के बाद दिसंबर में इसमें 2.4 फीसदी का इजाफा हुआ है), घरेलू हवाई यात्रा ट्रैफिक, तिपहिया वाहनों की बिक्री में इजाफा, रेलवे से माल ढुलाई में इजाफा और पोरबंदर की व्यस्ता का हवाला देते हुए कहा है कि अर्थव्यवस्था संकट की स्थिति में नहीं है. अब इसमें रिकवरी देखने को मिल रही है.नवंबर 2019 में औद्योगिक उत्पादन 1.8 फीसदी रहा जोकि अक्टूबर में -4 फीसदी के स्तर पर था. आरबीआई ने यह भी कहा है कि पीएमआई सर्विस इंडेक्स नवंबर 2019 के 52.7 फीसदी की तुलना में जनवरी 2020 के दौरान 55.5 फीसदी रहा. नए कारोबार के बढ़ने और आउटपुट में इजाफा होने से इसमें बढ़ोतरी हुई है.
वित्त मंत्री और आरबीआई ने अपनी बात कह दी है. ये सत्य है कि हाल के दिनों में जारी कई इंडीकेटर्स से पता चलता है कि कुछ सेक्टर्स में अब साकारात्मकता देखने को मिल रही है. लेकिन मुद्रास्फिति काफी अधिक है. दिसंबर और जनवरी में यह रिकॉर्ड स्तर पर रही है. फैक्ट्री एक्टिविटी के डेटा से पता चलता है आर्थिक सुस्ती अभी खत्म नहीं हुई है. ऐसे में अर्थव्यवस्था में ​कोई रिकवरी दूर की कौड़ी ही लग रही है.यह भी पढ़ें: जानिए ट्रेन में 15 रु की पानी वाली बोतल बेचकर कितने करोड़ कमाती है IRCTCहालांकि, यह भी सही है कि अगस्त से अक्टूबर 2019 के बीच लगातार तीन महीनों तक दबाव के बाद नवंबर महीने में औद्योगिक ग्रोथ साकारकारात्मक रहा. जोकि ग्रीन शूट के नैरेटिव को सपोर्ट करता है. लेकिन, इंडेक्टस आफ इं​​डस्ट्रियल प्रोडक्शन दिसंबर महीने के लिए नाकारात्मक रहा है. वित्त वर्ष 2019—20 के पहले 9 महीनों में ऐसा पहली बार हुआ है कि आईआईपी ग्रोथ में कुछ खास बदलाव नहीं हुआ है. इसमें 0.05 फीसदी का ही अंतर है. ब्रोकरेज एजेंसी आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने कहा है कि मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ दिसंबर के महीने में लाल निशान पर है. केवल इसी सेक्टर की वजह से आईआईपी निगेटिव में है.इस ब्रोकरेज एजेंसी ने कहा कि खपत होने वाले आइटम्स, और ड्यूरेबल और नॉन—ड्यूरेबल्स आइटम्स में दिसंबर के दौरान भारी गिरावट आई है. इससे साफ पता चलता है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में खपत अभी भी कमजोर ही है.केवल फैक्ट्री एक्टिविटी नहीं, महंगे दाल, दूध और अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतों में इजाफे ने महंगाई दर को खतरनाक दयारे में रखा है. इसे देखते हुए कहा जा सकता है कि निकट भविष्य में भारतीय रिजर्व अब नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला ले सकता है. केयर रेटिंग्स ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि जनवरी 2020 के दौरान खाद्य पदार्थों की महंगाई दर में 11.8 फीसदी का इजाफा हुआ है जोकि करीब जनवरी 2019 में 1.3 फीसदी घटा था.(लेखक एक वरिष्ठ पत्रकार हैं. ये उनके निजी विचार हैं.)यह भी पढ़ें:  पहली बार रेलवे देगा घर से सीट तक सामान पहुंचाने की खास सर्विस! यहां जानें



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