Sunday, September 27, 2020
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एफडी कराने वालों के लिए बड़ी खबर! इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 30 जून तक दी ये छूट

नई दिल्ली. फिक्स्ड डिपोजिट (FD- Fixed Deposite) को निवेश का एक सुरक्षित विकल्प माना जाता है. लोग थोड़ा कम रिटर्न ही सही, सुरक्षित निवेश विकल्प में निवेश करना चाहते हैं. ऐसे में अगर आप भी एफडी में निवेश किया है तो आपको बता दें कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) ने 15एच (15H Form) और फॉर्म 15जी फॉर्म (15G Form) भरने की तारीख बढ़ाकर 30 जून 2020 कर दी है. दरअसल एफडी की जब अवधि खत्म होती है तो उस पर ब्याज मिलता है. लेकिन तय सीमा से अधिक ब्याज होने पर उसमें से टीडीएस (TDS) काट ली जाती है. इससे बचने के लिए एफडी कराते समय में फॉर्म 15एच और फॉर्म 15जी भरना चाहिए. इससे मेच्योरिटी पर आपका टीडीएस नहीं कटेगा.

अगर आसान शब्दों में कहें तो मतलब साफ है कि किसी वित्त वर्ष में मिलने वाला ब्याज एक निश्चित सीमा से ज्यादा हो तो बैंक ब्याज की उस रकम पर टीडीएस काटते है. इससे पहले वित्त वर्ष यानी साल 2018-19 के लिए यह सीमा 10,000 रुपये थी और वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह 50,000 रुपये थी. वित्त वर्ष 2019-20 के लिए यह सीमा 40,000 रुपये और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 50,000 रुपये है.

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फॉर्म 15G और फॉर्म 15H क्या है – टैक्स एक्सपर्ट बताते हैं कि फार्म 15G और फॉर्म 15H एक फार्म है जो आप अपने बैंक में जमा कर सकते हैं यह सुनिश्चित करने के लिए कि अगर आपके द्वारा अर्जित कुल आय पर कोई कर दायित्व नहीं है तो टीडीएस आपकी आय से कटौती नहीं की जाती है. यह फॉर्म हरेक साल जमा किए जा सकते हैं. इसलिए, हर साल आपको यह जांचना है कि आप इन फॉर्म को भरने के लिए पात्र हैं या नहीं, अर्थात किसी भी वर्ष अगर आपकी आय कर के लिए लायक है, तो आप पात्र नहीं हैं.

(1) फॉर्म 15G और फॉर्म 15H सेल्फ-डेक्लेरेशन फॉर्म हैं. इनमें कोई व्यक्ति घोषित करता है कि उसकी इनकम टैक्सेबल लिमिट यानी कर लगने योग्य सीमा से कम है. इसलिए उसे टैक्स के दायरे से बाहर रखा जाए.

(2) फॉर्म 15G या 15H जमा कर आप ब्याज या किराये जैसी आमदनी पर TDS से बच सकते हैं. इन फॉर्म को बैंक, कॉरपोरेट बॉन्ड जारी करने वाली कंपनियों, पोस्ट ऑफिस या किराएदार को देना पड़ता है.

(3) फॉर्म 15G का इस्तेमाल 60 साल से कम उम्र के भारतीय नागरिक, हिंदू अविभाजित परिवार यानी HUF या ट्रस्ट कर सकते हैं. इसी तरह फॉर्म 15H 60 साल से ज्यादा की उम्र के भारतीय नागरिकों के लिए होता है.

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(4) 15G और 15H की वैधता सिर्फ एक साल के लिए होती है. इन्हें हर साल जमा करने की जरूरत पड़ती है. फॉर्म 15G या 15H के जमा करने में विलंब के कारण काटे गए अतिरिक्त TDS का रिफंड केवल इनकम टैक्स रिफंड फाइल कर ही लिया जा सकता है.

(5) जेल की सजा का प्रावधान- फॉर्म 15G में गलत डिक्लेयरेशन पर इनकम टैक्स ऐक्ट की धारा 277 के तहत पेनल्टी लग सकती है. टैक्स एक्सपर्ट बताते हैं कि इस फॉर्म में गलत जानकारी देने पर तीन महीने से लेकर दो साल तक की कैद की सजा हो सकती है. जुर्माना अलग से लगेगा. अगर 25 लाख से ज्यादा की टैक्स चोरी का मामला हो तो सात साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है.

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