कुडनकुलम परमाणु संयंत्र के बाद इसरो पर भी साइबर अटैक का खतरा, अमेरिकी फर्म ने किया अलर्ट

अमेरिका की साइबर सिक्योरिटी फर्म से उन्हें खुफिया जानकारी मिली थी कि इसरो और कुडनकुलम परमाणु संयंत्र के डोमेन में साइबर हमला किया जा सकता है.

तमिलनाडु (Tamil Nadu) स्थित कुडनकुलम परमाणु संयंत्र (Kudankulam Nuclear Plant) पर 30 अक्टूबर को वायरस अटैक (Virus attack) किया गया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated:
    November 6, 2019, 11:05 AM IST

नई दिल्ली. भारतीय संस्थानों और जानी-मानी हस्तियों की जासूसी किए जाने का मामला सामने आने के बाद आई एक रिपोर्ट ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. इसमें बताया गया कि तमिलनाडु (Tamil Nadu) स्थित कुडनकुलम परमाणु संयंत्र (Kudankulam Nuclear Plant) पर वायरस अटैक (Virus attack) के साथ ही भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (Indian Space Research Organisation – ISRO) को स्पाइवेयर के खतरों से आगाह किया गया था.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक नेशनल साइबर कोऑर्डिनेशन सेंटर की ओर से साइबर सुरक्षा खतरों को देखते हुए पहले ही जानकारी दी गई थी. अमेरिका की साइबर सिक्योरिटी फर्म से उन्हें इसरो और कुडनकुलम परमाणु संयंत्र के डोमेन कंट्रोलर में साइबर हमले का अलर्ट मिला था. बताया जाता है कि जांच में स्पाइवेयर की पहचान की गई जो डेटा चुराकर हैकर को भेजता था. इस स्पाइवेयर के जरिए किसी भी सिस्टम को पूरी तरह से हैक करके उसका पासवर्ड तक चुराया जा सकता है. रिपोर्ट में बताया गया है कि एनपीसीआईएल और इसरो को 4 सितंबर को अलर्ट जारी किया गया था.

Virus attack on Kudankulam nuclear plant, NPCIL claims-reactor is safe

कुडनकुलम परमाणु संयंत्र पर वायरस अटैक किया गया था.

कुडनकुलम परमाणु संयंत्र के न्यूक्लियर पॉवर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (Nuclear Power Corporation) ने पहले तो किसी भी हैकिंग की घटना से इनकार कर दिया था, लेकिन एक दिन बाद ही 30 अक्टूबर को एनपीसीआईएल ने माना था कि संयंत्र के कंट्रोल सिस्टम में लगे कंप्यूटरों पर मालवेयर से हमला किया गया है. हालांकि उसने दावा किया है कि उसके नेटवर्क को किसी भी तरह का नुकसान नहीं हुआ है. बताया जाता है कि 28 अक्टूबर केा संयंत्र का कुछ डेटा virustotal.com पर दिखाया गया था, जो एक ऑनलाइन मैलवेयर स्कैनिंग सेवा है.इसे भी पढ़ें :- कुडनकुलम परमाणु संयंत्र पर हुआ वायरस अटैक, एनपीसीआईएल का दावा-रिएक्टर है सुरक्षित

जांच के दौरान पाया गया था कि संस्थान के एक यूजर के सिस्टम में वायरस था और वह सिस्टम इंटरनेट नेटवर्क से जुड़ा हुआ था. जांच अधिकारियों ने बताया कि यह सिस्टम संस्थान के अहम आतंरिक नेटवर्क से पूरी तरह से अलग था, जिसके कारण किसी भी तरह की कोई दिक्कत नहीं हुई. जांच में भले ही एक सिस्टम में वायरस का पता चला है लेकिन अभी भी नेटवर्क पर लगातार नजर रखी जा रही है.

इसे भी पढ़ें :- 





Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here