Friday, September 25, 2020
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कॉमन कोल्ड होने पर नहीं हो सकता फ्लू, रिसर्च में किया गया दावा

कॉमन कोल्ड होने पर नहीं हो सकता फ्लू, रिसर्च में किया गया दावा

अगर शरीर में कॉमन कोल्ड वायरस मौजूद था, तो फ्लू वायरस नहीं था.

इस विशेष अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने एपीथिलियल सेल्स को जन्म देने वाली स्टेम कोशिकाओं से एक मानव वायुमार्ग ऊतक (Human Airway Tissue) बनाया है, जो फेफड़े के वायुमार्ग पर मौजूद हैं और हमेशा सांस संबंधी वायरसों को टार्गेट करते हैं.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    September 7, 2020, 4:34 PM IST

कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण भले की फ्लू (Flu) के वायरस से मिलता-जुलता हो लेकिन इसके परिणाम काफी घातक साबित हो रहे हैं. कोरोना के डर के चलते लोग इस समय कॉमन कोल्ड (Common Cold) यानी सामान्स सर्दी-जुकाम और फ्लू से भी घबराए हुए हैं. ऐसे में कॉमन कोल्ड, फ्लू और कोरोना वायरस को लेकर कई बातों का समझना बहुत ही जरूरी हो गया है. एक नए रिसर्च में यह बात सामने आई है कि कॉमन कोल्ड वायरस, फ्लू के वायरस को संक्रमित वायुमार्ग से रोकने में सक्षम हो सकता है. शोधकर्ताओं के मुताबिक राइनोवायरस (Rhinovirus), मनुष्यों में सबसे आम वायरल संक्रामक एजेंट और कॉमन कोल्ड का प्रमुख कारण होता है. यह शरीर के एंटीवायरल डिफेंस को तेजी से किकस्टार्ट करने के लिए जरूरी है, जिससे फ्लू से सुरक्षा मिलती है.

सांस संबंधी संक्रमण के लक्षण
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टर एलेन फॉक्समैन (Dr. Ellen Foxman) के नेतृत्व में येल यूनिवर्सिटी (Yale University) की टीम ने येल न्यू हेवेन अस्पताल में 13,000 से अधिक रोगियों के तीन साल के क्लीनिकल डेटा का अध्ययन किया. इन सभी मरीजों में सांस संबंधी संक्रमण के लक्षण मौजूद थे. कई महीनों तक चले रिसर्च के बाद पता चला कि जब दोनों वायरस सक्रिय थे, अगर शरीर में कॉमन कोल्ड वायरस मौजूद था, तो फ्लू वायरस नहीं था.

दो वायरस कैसे इंटरैक्ट करेंगेलैबोरेटरी मेडिसन और इम्यूनोबायोलॉजी की सहायक प्रोफेसर और अध्ययन की वरिष्ठ लेखिका डॉक्टर फॉक्समैन ने कहा कि जब उन्होंने आंकड़ों को देखा, तो यह स्पष्ट हो गया कि बहुत कम लोगों में एक ही समय में दोनों वायरस मौजूद थे. लेकिन साथ में उन्होंने ये भी कहा कि अभी भी जाना जा रहा है कि कॉमन कोल्ड वायरस के वार्षिक मौसमी प्रसार का कोरोना वायरस के संपर्क में आने वाले लोगों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है. उनके अनुसार यह अनुमान लगाना असंभव है कि दो वायरस बिना शोध किए कैसे इंटरैक्ट करेंगे.

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सांस संबंधी वायरसों को टार्गेट
इस विशेष अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने एपीथिलियल सेल्स को जन्म देने वाली स्टेम कोशिकाओं से एक मानव वायुमार्ग ऊतक (Human Airway Tissue) बनाया है, जो फेफड़े के वायुमार्ग पर मौजूद हैं और हमेशा सांस संबंधी वायरसों को टार्गेट करते हैं. पता चला कि टिश्यू का राइनोवायरस के संपर्क में आने के बाद, इन्फ्लूएंजा वायरस इसे संक्रमित करने में सक्षम नहीं था.

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