कोरोना वायरस को लेकर दुनियाभर में अंधविश्वासों की भरमार आ गई है.

कुछ ऐसी अतार्किक जमी-जमाई धारणाएं जो डर और अनिश्चितता की वजह से पनपती हैं वो अंधविश्वास को बढ़ाती हैं. कई बार इसके पीछे आस्था होती है तो कई बार दहशत भी जिम्मेदार होती है.

कोरोना वायरस (Corona Virus) को लेकर दुनियाभर की सरकारों के सामुहिक प्रयासों के साथ-साथ लोगों के बीच कई तरह के अंधविश्वास भी पनप रहे हैं. बीमारी का सटीक इलाज न मिल पाने की वजह से अंधेरे में तीर चलाने जैसे कई वाकये हो रहे हैं. भारत में तो ऐसे कई उदाहरण देखने को मिल रहे हैं. सोशल मीडिया पर कई मैसेज चल रहे हैं जिसमें इस रोग की दवाएं बताई जा रही हैं.मिडिल ईस्ट के देशों में फैले अंधविश्वास विशेष रूप से मिडिल ईस्ट के देशों में कुछ ज्यादा ही अंधविश्वास फैले हुए हैं. जैसे सऊदी अरब के एक इंटेलेक्चुअल के मुताबिक कोरोना वायरस कतर ने फैलाया है वो भी इसलिए कि सऊदी के 2030 के प्लान को रोक जा सके. गौरतलब है कि सऊदी ने देश के विकास के लिए 2030 एक प्लान बनाया है. वहीं एक अति रूढ़िवादी धार्मिक नेता का कहना है कि महामारी का मतलब है कि दुनिया में कोई मसीहा आने वाला है. तीन धर्मों के उद्गम केंद्र के रूप में पहचाने वाले मिडिल ईस्ट में कोरोना को लेकर क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की भी आशंका है.सऊदी अरब के एक पत्रकार नौरा-अल-मोटेरी का दावा है कि कोरोना वायरस के पीछे कतर का हाथ है. मोटेरी के दावे के मुताबिक कतर चाहता है कि विकास की दौड़ में सऊदी अरब को कोरोना वायरस के जरिए पीछे छोड़ा जा सकता है. मोटेरी ने इसे लेकर ट्वीट किया जिस पर काफी आलोचनाएं भी हुईं. वहीं यहूदियों के धार्मिक केंद्र इजरायल में लोगों का मानना है कि इस महामारी के साथ ही नए मसीहा का आगमन होगा. सोशल मीडिया पर कई तरह के वीडियो वायरल हो रहे हैं जिसमें धार्मिक नेता अपनी अलग-अलग थ्योरी दे रहे हैं.चीन में भी लोग करते हैं भरोसा ऐसा नहीं है कि इस तरह के अंधविश्वास सिर्फ मिडिल ईस्ट में पनप रहे हैं. चीन से भी ऐसी खबरें आई हैं. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक खबर के मुताबिक जब चीन में कोरोना फैला तो अंधविश्वास भी फैला. बहुत सारे चीनी लोगों का मानना है कि इस महामारी के फैलने के पीछे दुर्भाग्य का बहुत बड़ा हाथ है. साथ ही लोगों के बीच ये धारणा भी पनपी है कि ये किसी शाप या जादू-टोने का असर है. घबराए चीनी लोगों ने भविष्य वक्ताओं से मदद ली. दिलचस्प रूप से इसमें सबसे ज्यादा सवाल करियर और प्रेम को लेकर पूछे गए. Coronavirus
अगर यूरोप की बात की जाए तो वहां भी कई तरह के अंधविश्वास फैले हुए हैं. इन्हीं अधंविश्वासों में एक है शुक्रवार के दिन यात्रा न करने का. हालांकि अब तो यरोप में कई जगहों पर लॉकडाउन जारी है.आरोप लगा रहे हैं देश कोरोना वायरस को लेकर सिर्फ आम लोग ही नहीं बल्कि इसमें बड़े स्तर पर देश भी शामिल हैं. जब से कोरोना की खबर दुनिया में फैली है इसे बायो अटैक बताने के कई प्रयास किए गए हैं. विशेष रूप से पश्चिमी देशों के कई नेताओं ने इसे चीन में तैयार किया गया बायो वेपन भी बताय था. चीन ने भी इसका जवाब तीखे लहजे में दिया है.क्या कहता है अंधविश्वास का मनोविज्ञान कुछ ऐसी अतार्किक जमी-जमाई धारणाएं जो डर और अनिश्चितता की वजह से पनपती हैं वो अंधविश्वास को बढ़ाती हैं. कई बार इसके पीछे आस्था होती है तो कई बार दहशत भी जिम्मेदार होती है. जब व्यक्ति तक सही सूचनाएं नहीं पहुंच पातीं या उसका दिमाग इन सूचनाओं को स्वीकार नहीं करना चाहता है तब वो ऐसी मान्यताओं की तरफ मुड़ता है जो परालौकिक शक्तियों से जुड़ी होती हैं. उसे लगता है कि उसे किसी दूसरी दुनिया से कुछ सहायता मिल सकती है. साइकोलॉजी में इस मतिभ्रम, भ्रम या पैरानोइया भी कहा गया है. जैसे कोरोना को लेकर फिलहाल कोई दवा न होने की वजह से लोग डरे हुए हैं और शायद यही डर अंधविश्वासों के वैश्विक फैलाव की वजह है.ये भी पढ़ें:सबसे बड़ी बुजुर्ग आबादी वाले जापान का हाल क्यों इटली सरीखा नहीं हुआकोरोना के इलाज में ये है ट्रंप की पसंदीदा दवा, दुनियाभर में हो रही है लोकप्रियकोरोना वायरस से मरने वालों का नहीं हो पा रहा है अंतिम संस्कार, वेटिंग लिस्ट में हैं लाशें

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First published: March 23, 2020, 5:20 PM IST



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