Tuesday, October 20, 2020
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कोविड 19: दूसरे दौर के लिए किन देशों ने किस तरह की तैयारी?

हमें इतिहास से सबक ​लेना ही चाहिए क्योंकि हमेशा न सही, लेकिन अक्सर इतिहास खुद को दोहराता है. 100 साल पहले के स्पैनिश फ्लू (Spanish Flu) के भी कई दौर इतिहास में दर्ज हैं इसलिए कई देश कोरोना वायरस (Corona Virus Infection) महामारी की सेकंड वेव के लिए तैयारी कर पाए. हालांकि अब तक भी दुनिया के कुछ हिस्सों में पहले दौर को ही काबू में लाने के लिए संघर्ष जारी है. भारत में संक्रमण (Corona in India) के दूसरे दौर की आहटें महसूस की जा रही हैं, तो यूके जैसे कुछ देश राहत महसूस कर सके हैं.

लॉकडाउन और बदली जीवन शैली के साथ कई जगहों पर जीवन सामान्य गति में लौटने की कोशिश कर रहा है. दूसरी तरफ, कोविड के खिलाफ वैक्सीन के लिए भी दुनिया भर में कोशिशें चल रही हैं, लेकिन अब भी किसी के पास इस बात का जवाब नहीं है कि महामारी पर काबू कैसे पाया जा सकता है. देखिए कि कई देशों ने सेकंड वेव के लिए किस तरह की तैयारी की.

क्यों यहां हल्का रहा दूसरा दौर?
चीन और न्यूज़ीलैंड दोनों ही देशों में महामारी के दूसरे दौर का असर काफी कम देखा गया. हालांकि दोनों ही देशों में दूसरे दौर के संक्रमण के ओरिजिन को नहीं पहचाना जा सका लेकिन पूरी तरह आइसोलेशन, अनिवार्य और सख्त क्वारंटाइन नियमों और तमाम सावधानियों को अपनाकर यहां महामारी को काबू में रख पाने में कामयाबी मिली. फटाफट टेस्ट करने और कॉंटैक्ट ट्रेस करने जैसे कदमों से भी काफी मदद मिली.ये भी पढ़ें :- “समुद्र में दिखा तो मार गिराएंगे ‘सिविलियन’ विमान”, क्या चीन ने ऐसी धमकी दी?

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न्यूज़18 क्रिएटिव

पहले सब ठीक रहा, फिर आफत
यूरोप के मध्य और पूर्व हिस्सों में महामारी की शुरूआत में ऐसा लगा कि यहां तो सब काबू में है, लेकिन फिर आफत का दौर शुरू हुआ. कमज़ोर हेल्थ सिस्टम वाले चेक गणराज्य और हंगरी जैसे देशों का उदाहरण सामने रहा. लेकिन जब यहां केस बढ़ने शुरू हुए, तो समझा गया कि शुरूआती कामयाबी का मतलब यही था कि वायरस के खिलाफ कंट्रोल को लेकर लोगों में हिचकिचाहट ज़्यादा थी.

इस बारे में गार्जियन की रिपोर्ट की मानें तो इन देशों में नेतृत्व ने लोगों के लिए ओपिनियन बनाने का काम किया. जैसे सरकार ने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी नियमों में ढील दी गई क्योंकि जनता की यही मांग थी. ऐसे में, जनता ने भी सरकार की बात मानकर हिदायतों का ढंग से पालन करने में लापरवाही ही दिखाई.

यहां रही सेकंड वेव के लिए ठीक तैयारी
जर्मनी और दक्षिण कोरिया. इन दोनों देशों ने टेस्टिंग और ट्रैसिंग के ज़रिये सेकंड वेव को काबू में रखने में कामयाबी पाई. जर्मनी में गर्मियों के छुट्टियों से लौट रहे हर व्यक्ति की टेस्टिंग की तो इससे बाहर से आने वाले संक्रमण को रोका जा सका. लेकिन यहां विशेषज्ञ कह रहे हैं कि आने वाला ठंडा मौसम फिर कहर बरपा सकता है. दक्षिण कोरिया उन शुरूआती देशों में है, जहां सेकंड वेव देखी जा चुकी. लेकिन, साउथ कोरिया ने इस पर काबू भी पाने का दावा किया और अब वहां रोज़ाना केसों में कमी दिख रही है.

आंशिक लॉकडाउन की नीति
स्पेन और ऑस्ट्रेलिया ने अलग नीति अपनाते हुए अपने देश को दुनिया से काट लिया था. जब कई देशों में संपूर्ण लॉकडाउन की नीति चल रही थी तब इन देशों ने वायरस के फैलने वाले इलाकों में लॉकडाउन का तरीका अपनाया था. अब मैड्रिड में फिर काबू करने के यही तरीके अपनाए जा रहे हैं. जिन इलाकों में एक लाख की आबादी पर एक हज़ार से ज़्यादा केस हैं, वहां प्रतिबंध लगाए जाएंगे और वहां बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी.

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न्यूज़18 क्रिएटिव

जहां कहर बनी सेकंड वेव
दक्षिण अफ्रीका, दुनिया का वो देश था जहां सबसे सख्ती से लॉकडाउन लगाया गया. इसके बावजूद यहां केसों की संख्या बढ़ती ही गई. वैज्ञानिक इस बात पर भी विचार कर रहे हैं कि गरीबी के कारण जहां सोशल डिस्टेंसिंग मुमकिन नहीं है, वहां कोविड महामारी पर काबू पाने के क्या तरीके हो सकते हैं. यहां अब इस बात को ही महत्व दिया जा रहा है कि लोग पहले भी कई तरह के संक्रमणों से ग्रस्त हैं इसलिए यहां कोरोना के खिलाफ लड़ने की इम्युनिटी लोगों में है.

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इसी तरह, ब्राज़ील के कुछ इलाकों समेत कई और जगहों पर भी लोगों को जोखिम में छोड़ दिया गया और यहां भी हर्ड इम्युनिटी की थ्योरी का ही प्रयोग जारी है. ऐसी जगहों पर सेकंड वेव के खतरनाक होने से इनकार नहीं किया जा सकता.

भारत में क्या आ गई सेकंड वेव?
जब केसों की संख्या और रफ्तार बेहद कम थी, तब संपूर्ण देश में लॉकडाउन लगा दिया गया था और लॉकडाउन खुलने के बाद से भारत में केसों की संख्या और गति दोनों ही बहुत तेज़ी से बढ़ी. कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि यहां सेकंड वेव आ चुकी, जबकि कुछ मान रहे हैं कि सेकंड वेव की शुरूआत हुई है तो कुछ का मानना है कि आगामी सर्दियों के मौसम में भारत में सेकंड वेव आएगी.

बहरहाल, भारत फिलहाल मौजूदा संक्रमण को हैंडल करने में ही जूझ रहा है क्योंकि आबादी के लिहाज़ से दुनिया के दूसरे सबसे बड़े देश में स्वास्थ्य सुविधाओं का ढांचा कमज़ोर पड़ता दिख रहा है. पिछले दिनों महाराष्ट्र सरकार ने कहा कि सर्दियों में सेकंड वेव काफी खतरनाक साबित हो सकती है और इससे निपटने के लिए जम्बो कोविड अस्पतालों की ज़रूरत होगी.

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