तेजी से बदल रहा है धरती का पर्यावरण। के अमेजन के जंगल में आग इस सदी की सबसे भयानक त्रासदी है। यह आग लगभग 5 हजार किलोमीटर एरिये में फैल चुकी है और हर दिन एक फुटबॉल के मैदान के बराबर आग फैल रही है। इस आग से निकलने वाले धुएं का असर दक्षिणी अमेरिका के 9 देशों में देखने को मिल रहा है। इसके कारण अब तक की सबसे अधिक कार्बन डाईऑक्साइड पैदा हो रही है। नासा की मानें तो ये धुआं अटलांटिक तटों तक फैल रहा है।

दुनिया का सबसे बड़ा वर्षावन और 20 प्रतिशत से अधिक ऑक्सिजन उत्पन्न करने वाला यह जंगल यदि खत्म हो गया तो धरती के पर बहुत गहरा असर होने वाला है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस आग को लेकर चिंता जाहिर की जा रही है लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। ब्राजील में आपातकाल घोषित हो चुका है।
दूसरी ओर दुनिया के खत्म हो रहे हैं। हाल ही में के चलते आइसलैंड का ‘ओक्जोकुल’ ग्लेशियर खत्म हो गया। इसी तरह अंटार्कटिका, अलास्का, न्यूजीलैंड, स्विट्जरलैंड, किलिमंजारो पर्वत, चिली, ग्रीनलैंड और दुनियाभर के ग्लेशियर जिसमें हिमालय भी शामिल है वहां की बर्फ तेजी से पिघल रही है।
मतबल यह कि एक ओर ग्लेशियर पिघल रहे हैं तो दूसरी ओर जंगल खत्म हो रहे हैं। एक तीसरी ओर धरती के प्राकृतिक संसाधनों का लगातर दोहन किए जाने के कारण भविष्य में धरती पर या तो समुद्र का सम्राज्य रहेगा या भी सिर्फ आग ही आग होगी।

पुराणों के अनुसार प्रलय : हिन्दू पुराणों में का वर्णन लिखा है। इसमें कहा गया है कि कलयुग की प्रजा बाड़ और सूखे के भय से व्याकुल रहेगी। सबके नेत्र आकाश की ओर लगे रहेंगे। वर्षा न होने से मनुष्य तपस्वी लोगो की तरह फल मूल व् पत्ते खाकर और कितने ही आत्मघात कर लेंगे। कलयुग में सदा अकाल ही पड़ता रहेगा। सब लोग हमेशा किसी न किसी कलेशो से घिरे रहेंगे। कलयुग के अंत के समय बड़े-बड़े भयंकर युद्ध होंगे, भारी वर्षा, प्रचंड आंधी और जोरों की गर्मी पड़ेगी। लोग खेती काट लेंगे, कपड़े चुरा लेंगे, पानी पिने का सामान और पेटियां भी चुरा ले जाएंगे। चोर अपने ही जैसे चोरों की संपत्ति चुराने लगेंगे। हत्यारों की भी हत्या होने लगेगी, चोरों से चोरों का नाश हो जाने के कारण जनता का कल्याण होगा। युगान्त्काल में मनुष्यों की आयु अधिक से अधिक तीस वर्ष की होगी।
कलियुग के अंत में संसार की ऐसी दशा होगी कि अन्न नहीं उगेगा। लोग मछली-मांस ही खाएंगे और भेड़ व बकरियों का दूध पिएंगे। गाय तो दिखना भी बंद हो जाएगी। होगी तो वह बकरी समान होगी। एक समय ऐसा आएगा, जब जमीन से अन्न उपजना बंद हो जाएगा। पेड़ों पर फल नहीं लगेंगे। धीरे-धीरे ये सारी चीजें विलुप्त हो जाएंगी। गाय दूध देना बंद कर देगी।


श्रीमद्भागवत के अनुसार बहुत काल तक सूखा रहने के बाद कलियुग में अंतिम समय में बहुत मोटी धारा से लगातार वर्षा होगी, जिससे चारों ओर पानी ही पानी हो जाएगा। समस्त पृथ्वी पर जल हो जाएगा और प्राणियों का अंत हो जाएगा। इसके बाद एक साथ बारह सूर्य उदय होंगे और उनके तेज से पृथ्वी सूख जाएगी। कलियुग के अंत में भयंकर तूफान और भूकंप ही चला करेंगे। लोग मकानों में नहीं रहेंगे। लोग गड्डे खोदकर रहेंगे। धरती का तीन हाथ अंश अर्थात लगभग साढ़े चार फुट नीचे तक धरती का उपजाऊ अंश नष्ट हो जाएगा। भूकंप आया करेंगे।


महाभारत के अनुसार : महाभारत में कलियुग के अंत में प्रलय होने का जिक्र है, लेकिन यह किसी जल प्रलय से नहीं बल्कि धरती पर लगातार बढ़ रही गर्मी से होगा। महाभारत के वनपर्व में उल्लेख मिलता है कि कलियुग के अंत में सूर्य का तेज इतना बढ़ जाएगा कि सातों समुद्र और नदियां सूख जाएंगी। संवर्तक नाम की अग्नि धरती को पाताल तक भस्म कर देगी। वर्षा पूरी तरह बंद हो जाएगी। सब कुछ जल जाएगा, इसके बाद फिर बारह वर्षों तक लगातार बारिश होगी। जिससे सारी धरती जलमग्र हो जाएगी।

की भविष्यवाणी : नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी के विश्लेषकों अनुसार नास्त्रेदमस ने प्रलय के बारे में बहुत स्पष्ट लिखा है कि मैं देख रहा हूं कि आग का एक गोला पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है जो धरती से मानव की विलुप्ति का कारण बन सकता है। ऐसा कब होगा इसके बारे में स्पष्ट नहीं, लेकिन ज्यादातर जानकार 2012 को ऐसा होने की घोषणा करते हैं। ऐसा तब होगा जबकि तृतीय विश्व युद्ध चल रहा होगा तब आकाश से एक उल्का पिंड हिंद महासागर में गिरेगा और समुद्र का सारा पानी धरती पर फैल जाएगा जिसके कारण धरती के अधिकांश राष्ट्र डूब जाएंगे या यह भी हो सकता है कि इस भयानक टक्कर के कारण धरती अपनी धूरी से ही हट जाए और अंधकार में समा जाए।


नास्त्रेदम ने वैस तो मानव गतिविधियों के कारण कहीं जल प्रलय तो कहीं सूखा होने की भविष्यवाणी जरूर की है। सात दिन और सात रातों के लिए आदमी यह भयानक दृष्टि देखेंगे, ज्वार अपने केन से परे वृद्धि होगी दूर किनारे तो काटने और एक उग्र अजगर आकाश पार हो जाएगा, इस पृथ्वी से पहले छह बार मर जाएगा, मानवता और भयभीत हो काप इस भविष्यवाणी में छठे के लिए, महान सितारा सात दिनों के लिए जला देगा, बादल दो सूर्य प्रकट करने के लिए कारण होगा, बड़ा बड़ा कुत्ता चीख सारी रात महान पोप देश बदल जाएगा।


नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी के मुताबिक धनु राशि का तीर एक स्याह हलचल की ओर इशारा कर रहा है, विनाश की शुरुआत से पहले तीन ग्रहण पड़ेंगे और तब सूरज और धरती पर तीव्र भूकंप आएंगे। सूरज पर भूकंप से विकिरण के तीव्र तूफान उठेंगे जो धरती को इस कदर गरमा देंगे कि ध्रुवों पर जमी बर्फ पिघलने लगेगी। जब ऐसा होगा तब धरती के ध्रुव भी बदल जाएंगे। कुंभ राशि के युग की शुरुआत में आसमान से एक बड़ी आफत धरती पर आ टूटेगी। धरती का ज्यादातर हिस्सा प्रलयकारी बाढ़ की चपेट में आ जाएगा और तब जान और माल की भारी क्षति होगी।





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