Monday, October 19, 2020
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दिल पर भारी पड़ सकता है इन संकेतों को नजरअंदाज करना!

पुरानी बीमारियों से ग्रसित रोगियों के लिए जीवन की अच्छी गुणवत्ता बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि नई बीमारियों (Diseases) से बचना. वर्तमान में हमारे देश में दिल की धड़कन रुकना जैसी बीमारियों का मामले बढ़ते जा रहे हैं. दिल से संबंधित बीमारियां (Heart Related Diseases) को लेकर गंभीर स्थिति हैं, जिनमें समय पर और निरंतर देखभाल की आवश्यकता होती है. देखभाल की कमी के कारण भारत में हृदय रोगों के कारण होने वाली मौतों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में वृद्धि देखी गई है. हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मोटापा, मधुमेह और गठिया रोग (Rheumatic) जैसी बीमारियों के बढ़ने के कारण होता है. खराब जीवनशैली इस वृद्धि के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार है.

कारण और जोखिम
हालांकि बुजुर्गों में दिल की धड़कन रुकना आम है, लेकिन मधुमेह और उच्च रक्तचाप की समस्या युवाओ में बढ़ी है. इसके अलावा जन्मजात हृदय रोग, दिल का दौरा पड़ने या दिल की बीमारी जैसे अन्य कारक भी इस जोखिम को बढ़ाते हैं.

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शरीर में ऊर्जा की कमी और कमजोरी का अहसास होना
सांस लेने में कठिनाई का सामना करना
पैरों या भुजाओं में सूजन
रात में बार-बार पेशाब आना
चक्कर आना या बेहोशी
थकान

जी मिचलाना

प्रबंधन
दिल की धड़कन रुकना जैसी बीमारी एक प्रकार से प्रगतिशील बीमारी है जो समय के साथ बढ़ती जाती है, क्योंकि हृदय की पंपिंग क्रिया कमजोर हो जाती है. न्यूयॉर्क हार्ट एसोसिएशन वर्गीकरण (NYHA Class 1-4) के अनुसार इस बीमारी को 4 चरणों में वर्गीकृत किया जा सकता है. स्टेज 1 और स्टेज 2 को प्री-हार्ट फेल्योर चरण माना जाता है, जबकि स्टेज 3 हृदय से सम्बंधित रोगियों को संदर्भित करता है, जिनके पास बीमारी के लक्षण थे. चरण 4 दिल की विफलता के उन्नत लक्षणों वाले रोगियों को संदर्भित करता है. जबकि वर्तमान समय में इस बीमारी से सम्बंधित कोई स्थायी इलाज नहीं है. ऐसे में इसे जीवन शैली में परिवर्तन, चिकित्सा और चिकित्सा प्रक्रियाओं जैसे कि एलवीएडी (Left Ventricular Assist Device-LVAD) आरोपण और हृदय प्रत्यारोपण के माध्यम से प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है.

उपचार
दिल की धड़कन रुकना जैसी बीमारी को इसके चरण के आधार पर इलाज किया जा सकता है, क्योंकि हर चरण के साथ इसकी गंभीरता बढ़ जाती है. पहले चरण में उपचार के लिए दवा और जीवन शैली में परिवर्तन शामिल है, जबकि इसके बाद के लिए सर्जरी, प्रत्यारोपण या उपकरण आरोपण प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं. इस प्रकार के रोगियों के लिए कई तरह के उपचार उपलब्ध हैं- सर्जरी, इम्प्लांटेबल डिवाइस जैसे पेसमेकर और आईसीडी (इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफाइब्रिलेटर) और थेरेपी. अंतिम चरण के लिए दिल का प्रत्यारोपण या LVAD कोमाना जाता है.

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रोकथाम
धूम्रपान, शराब और कैफीन का अधिक सेवन ना करना
बाहरी गतिविधियों और व्यायाम में व्यस्त रहें
स्वस्थ और अच्छी तरह से संतुलित आहार लें
चेतावनी के संकेतों और लक्षणों को जानें और सावधान रहें.
उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए पौष्टिक और कम सोडियम वाले आहार लेना

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