Friday, September 18, 2020
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नए नियमों से क्या होगा म्यूचुअल फंड्स में लगे आपके पैसों पर असर? जानिए सभी सवालों के जवाब

मुंबई. मार्केट रेग्युलेटर सेबी (SEBI-Securities and Exchange Board of India) ने म्यूचुअल फंड्स की मिडकैप कैटेगिरी को लेकर नए नियम जारी किए है. नए नियमों के मुताबिक, एक मल्टीकैप फंड को शेयर बाजार में कुल 75 फीसदी रकम लगानी होगी. अभी तक इसकी लिमिट 65 फीसदी थी. साथ ही, इस 75 फीसदी रकम में से 25 फीसदी लार्जकैप शेयरों में लगानी होगी. वहीं, 25 फीसदी मिडकैप और 25 फीसदी हिस्सा स्मॉलकैप शेयरों में लगाना होगा. इस फैसले से शेयर बाजार के निवेशकों को बड़ा फायदा होगा. आपको बता दें कि नए नियम जनवरी 2021 से लागू होगा.

क्या होता है म्यूचुअल फंड्स? 

अगर आसान शब्दों में कहें तो म्यूचुअल फंड में कई निवेशकों का पैसा एक जगह जमा किया जाता है. इसे फिर एक फंड मैनेजर शेयर बाजार और अन्य जगह जैसे गवर्नमेंट बॉन्ड्स इत्यादि में निवेश करता है.  म्यूचुअल फंड को एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) द्वारा मैनेज किया जाता है. प्रत्येक AMC में आमतौर पर कई म्यूचुअल फंड स्कीम होती हैं.

SEBI ने म्यूचुअल फंड्स के कौन-कौन से नियमों को बदल दिया?सेबी के नए सर्कुलर के मुताबिक, एक मल्टीकैप फंड (जो मिडकैप कंपनियों के शेयरों में पैसा लगाता है) को शेयर बाजार में कुल 75 फीसदी रकम लगानी होगी. अभी तक इसकी लिमिट 65 फीसदी थी. साथ ही, इस 75 फीसदी रकम में से 25 फीसदी लार्जकैप शेयरों में लगानी होगी. वहीं, 25 फीसदी मिडकैप और 25 फीसदी हिस्सा स्मॉलकैप शेयरों में लगाना होगा. इस फैसले से शेयर बाजार के निवेशकों को बड़ा फायदा होगा.

मिडकैप फंड्स कौन से होते है?

जैसा कि नाम से पता चलता है, मिडकैप म्यूचुअल फंड स्कीमें मध्यम आकार की कंपनियों में निवेश करती हैं. इनमें बड़े आकार की कंपनी बनने का दमखम होता है. बेशक इनके साथ जोखिम और अस्थिरता ज्यादा होती है. लेकन, इनसे अधिक रिटर्न की भी अपेक्षा की जा सकती है. हालांकि, आप अगर ज्यादा जोखिम नहीं ले सकते हैं, न ही लंबी अवधि को ध्यान में रखकर निवेश कर सकते हैं तो लार्जकैप या मल्टीकैप जैसे अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले विकल्पों में पैसा लगाना बेहतर है.

कैसे पता लगता है कि कौन सी कंपनी मिडकैप है?

मार्केट कैप के लिहाज से शेयर बाजार की पहली 100 कंपनियों को लार्ज कैप कहा जाता है. इस लिस्ट में 101 से 250 तक की कंपनियों को मिडकैप कैटेगिरी में रखा जाता है. वहीं, 251 से आगे वाली कंपनियों को स्मॉलकैप की लिस्ट में रखा जाता है.

 म्यूचुअल फंड्स में लगे पैसों क्या होगा असर, जानिए एक्सपर्ट्स की राय

सेबी के इस फैसले से क्या होगा निवेशकों पर असर?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि मल्टी-कैप को लेकर नया सर्कुलर इसके बेहतर लेबल को दर्शाता है. फिलहाल इन फंड्स में अधिकतर हिस्सा लॉर्ज-कैप का ही है. यही कारण है कि मल्टी-कैप व लार्ज-कैप में अंतर करना भी मुश्किल हो जाता है. वर्तमान में हर मल्टी-कैप में औसतन 70 फीसदी लॉर्ज कैप स्टॉक्स हैं. मिड-कैप के लिए यह आंकड़ा 22 फीसदी और स्मॉल-कैप के लिए 8 फीसदी है. हालांकि, अंदेशा लगाया जा रहा है कि छोटी अवधि में मिड और स्मॉल-कैप्स में लिक्विडिटी की समस्या खड़ी हो सकती है. क्योंकि, अब फंड मैनेजर तेजी से निवेश बढ़ाएंगे. ऐसे में कम लिक्विडिटी (शेयर में कम कारोबार) मैनेजर की टेंशन बढ़ा सकती है.

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