नागरिकता संशोधन बिल पर फिर मचा बवाल, नॉर्थ-ईस्ट में बढ़ सकती है BJP की मुश्किलें

नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 के तहत नागरिकता कानून 1955 में संशोधन की जाएगी

नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 बिल (Citizenship Amendment Bill 2016) का अल्पसंख्यकों की तरफ से भारी विरोध हो रहा है. NRC धर्म के आधार पर अवैध प्रवासियों को अलग नहीं करता है, जबकि ये बिल मुसलमानों को शामिल नहीं करता.

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  • Last Updated:
    November 18, 2019, 9:28 AM IST

(आदित्य शर्मा)

नई दिल्ली. नागरिकता संशोधन बिल (Citizenship Amendment Bill 2016) एक बार फिर से आज से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा. पिछली बार ये बिल सिर्फ लोकसभा में पारित हो सका था. मोदी सरकार इस बिल को राज्यसभा में पेश नहीं कर सकी थी. लेकिन एक बार फिर से सरकार ने जैसे ही इस बिल को संसद में पेश करने की तैयारी शुरू की इसके खिलाफ विरोध की आवाज़ें उठने लगी है. खास कर नॉर्थ-ईस्ट में तो कोहराम मचा हुआ है. यहां हर दिन सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

शुक्रवार को गुवाहाटी में लोगों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया. ये वो लोग हैं जिन्होंने नागरिकता संशोधन विधेयक (NRC) का समर्थन किया था लेकिन ये सब नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ हैं. इस बिल के जरिए बांग्लादेश से भारत आए हिंदुओं को नागरिकता दी जाएगी.

क्या है नागरिकता संशोधन विधेयक 2016?>नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 के तहत नागरिकता कानून 1955 में संशोधन की जाएगी.
>इस बदलाव के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए गैर मुस्लिम धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता दिए जाने की बात कही गई है.
>इस बिल के कानून बनने के बाद अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के मानने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को 11 साल के बजाय छह साल भारत में रहने पर और बिना उचित दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा.

>इतना ही नहीं इन समुदाय के लोगों को पासपोर्ट एक्ट 120 और विदेशी अधिनियम 1946 के तहत जेल की सज़ा भी नहीं होगी. इसके लिए 31 दिसंबर 2014 की डेडलाइन रखी गई है. यानी पड़ोसी देशों से इस तारीख तक आने हिंदुओं को भारत की नागरिकता दी जाएगी.

बिल का भारी विरोध 
नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 बिल का अल्पसंख्यकों की तरफ से भारी विरोध हो रहा है. NRC धर्म के आधार पर अवैध प्रवासियों को अलग नहीं करता है, जबकि ये बिल मुसलमानों को शामिल नहीं करता. साल 2016 में इस बिल को लाने के बाद से ही नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों में भारी विरोध-प्रदर्शन हो रहा है. असम, मणीपुर, नगालैंड और मेघालय हर तरफ लोगों ने इस बिल का भारी विरोध किया था. इस साल अक्टुबर में जब गृहमंत्री अमित शाह मिज़ोरम के दौरे पर गए थे तब वहां कई संगठनों ने विरोध किया था. असम में ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के प्रमुख सलाहकार समुजल भट्टाचार्या ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि वो किसी भी शर्त पर इस बिल को नहीं मानेंगे.

लोगों का बिल से क्यों है आपत्ति?
असम में सबसे ज्यादा विरोध बिल के खंड 6 से हो रहा है. इसमें कहा गया है कि जो लोग 1 जनवरी 1966 से 24 मार्च 1971 के बीच भारत आए हैं उन्हें विदेशी कहा जाएगा. उन्हें खुद को विदेशी नागरिक के तौर पर रजिस्टर करना होगा.  इसके अलावा अगर देखा जाए तो ये बिल NRC के खिलाफ भी है. NRC के तहत 24 मार्च 1971 के बाद आए 19 लाख लोगों का नाम नागरिकता की लिस्ट से हटा दिया गया. आरटीआई एक्टिविस्ट अखिल गोगई का कहना है कि इसका मतलब ये हुआ कि जो भी हिंदू बांग्लादेश से भारत आए उन्हें एक बार फिर से इस बिल के जरिए बारत का नागरिक बनने का मौका मिलेगा. जबकि मुसलमानों के लिए ऐसा नहीं है.

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First published: November 18, 2019, 9:28 AM IST





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