निर्भया केस: जानिए, भारत में किस कानूनी प्रावधान के तहत दी जाती है फांसी

निर्भया केस के गुनहगार

अपराधी (Criminal) को मौत की सजा (Death Sentence) देने के लिए रॉयल कमीशन, विधि आयोग और सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सबसे बेहतर तरीका फंदे पर लटका कर फांसी (Hanging) देने को पाया, निर्भया केस (Nirbhaya Case) में गुनहगारों को 16 दिसंबर को हो सकती है फांसी

  • News18Hindi
  • Last Updated:
    December 13, 2019, 12:18 PM IST

नई दिल्ली. निर्भया केस (Nirbhaya Case) में गुनहगार अब फांसी (Hanging) के फंदे से कुछ ही दूर हैं. पूरा देश चाहता है कि हत्यारों को जल्द से जल्द फांसी पर लटकाया जाए, ताकि इस बेटियों के खिलाफ बर्बरता रुक सके. हालांकि, जब-जब किसी अपराधी को फांसी की सजा देने की बारी आई, इस तरह की सजा देने पर सवाल भी उठाए गए. इसे बर्बर बताते हुए इसकी संवैधानिकता पर सवाल उठाए गए, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में याचिकाएं भी दायर की गईं, लेकिन कोर्ट ने फंदे पर लटकाकर फांसी देने की प्रक्रिया को बर्बर या अमानवीय न मानते हुए संवैधानिक ठहराया. भारत (India) में फंदे पर लटकाकर फांसी की सजा दिये जाने का कानूनी प्रावधान सी.आर.पी.सी. की धारा 354 (5) में है.

‘आंखों देखी फांसी’ नामक अपनी पुस्तक में वरिष्ठ पत्रकार गिरिजाशंकर लिखते हैं कि ‘दुनिया भर में मौत की सजा देने के कई तरीके में चलन में रहे हैं. सूली पर चढ़ाना, जिंदा जलाना, पत्थर बरसाकर या पानी में डुबाकर मारना, घोड़ों के साथ बांधकर खिंचवाना, सिर कलम करना, भूखे शेर या मगरमच्छ के हवाले करना जैसे कई तरीके अलग-अलग देशों में प्रचलित रहे हैं. तलवार से गला काटकर धड़ से अलग कर के सजा दिए जाने का प्रचलन भी कई देशों में रहा है. सलीब पर लटकाकर, अपराधी के शरीर के कई हिस्सों में कीलें ठोंककर सजा देना भी काफी चलन में रहा है.

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निर्भया गैंगरेप के दोषियों को 16 दिसंबर को ही दी जाएगी फांसी

गिरिजाशंकर लिखते हैं कि फंदे पर लटकाकर सजा देने के शुरुआती दौर में अपराधी को पेड़ की किसी डाली में तब तक लटकाया जाता था, जब तक कि उसकी मौत न हो जाए. यही विधि पहले से निर्मित प्लेटफॉर्म पर खड़ा कर के फांसी के फंदे पर लटकाकर मौत देने के रूप में भारत सहित कई देशों में प्रचलित है.अपराधी को मिले कम से कम पीड़ा

फांसी की सजा देने के तरीकों में लगातार बदलाव और इसमें सुधार की बात की जाती रही है कि कैदी को कम से कम पीड़ा का अहसास हो, सजा दिए जाने का समय कम से कम हो और सजा देने की प्रक्रिया में मानवीय गरिमा भी कायम रह सके. बिजली की ‘की’ पर बिठाकर करंट के जरिये या जहर वाला इंजेक्शन लगाकर सजा दिए जाने का प्रयोग भी कुछ देशों में किया जाता है. बावजूद इसके फंदे पर लटकाकर सजा देने की प्रथा सर्वाधिक प्रचलन में है.

दीना बनाम भारत सरकार प्रकरण

दीना बनाम भारत सरकार प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने यह पाया कि फांसी के फंदे पर लटकाना संवैधानिक रूप से मौत की सजा देने का वैध तरीका है. फंदे पर लटकाने की प्रक्रिया में कोई दुष्टता या उत्पीड़न नहीं है. फांसी के फंदे पर लटकाने को बिजली की कुर्सी अथवा गैस चैंबर या मृत्युदायी इंजेक्शन, गोली मारने में बदलने के तर्क को अस्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि फांसी के फंदे पर लटकाने के बदले इन विधियों में से कोई भी अधिक ठीक नहीं है.

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दिसंबर 2012 में हुई निर्भया गैंगरेप की घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था

रॉयल कमीशन और फांसी

गिरिजाशंकर लिखते हैं कि फांसी की सजा पर गठित रॉयल कमीशन (1949-1953) ने पाया कि फंदे से लटकाकर देने वाली फांसी की सजा तुलनात्मक रूप से अधिक मानवीय है. विधि आयोग ने भी सजा देने के लिए फंदे पर लटकाने की प्रक्रिया को स्वीकार किया है.

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First published: December 13, 2019, 11:38 AM IST





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