कोलकाता पुस्तक मेले में पुलिस ने वीएचपी को 'हनुमान चालीसा' बांटने से रोका

44वें अंतरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेले (प्रतीकात्मक-फोटो)

वीएचपी सदस्य स्वरूप चटर्जी ने कहा, ‘शुरू में तनाव था, लेकिन जब हमने जानना चाहा कि हनुमान चालीसा क्यों नहीं वितरित की जा सकती है, जबकि अन्य संग‍ठन कुरान और बाइबिल बांट सकते हैं. इसके बाद पुलिस ने अपना रुख नरम किया और हमने पुस्तक बांटना जारी रखा.’

  • News18Hindi
  • Last Updated:
    February 10, 2020, 8:36 AM IST

कोलकाता. पश्चिम बंगाल में रविवार को 44वें अंतरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेले (44th International Kolkata Book Fair 2020) का अंतिम दिन था. इस दौरान रविवार को पुलिस ने कुछ वक्त के लिए विश्व हिन्दु परिषद् (VHP) के कार्यकर्ताओं को ‘हनुमान चालीसा’ बांटने से रोका, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद हो गया. पुलिस ने कहा कि उन्होंने धार्मिक किताब बांटने पर इसलिए ऐतराज जताया कि इससे आगुंतक भावावेश में आ सकते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है.

बहरहाल, पुलिस ने बाद में अपना रुख नरम किया और विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ताओं ने किताब को बांटना फिर से शुरू कर दिया. विहिप सदस्य स्वरूप चटर्जी ने कहा, ‘शुरू में तनाव था, लेकिन जब हमने जानना चाहा कि हनुमान चालीसा क्यों नहीं वितरित की जा सकती है, जबकि अन्य संग‍ठन कुरान और बाइबिल बांट सकते हैं. इसके बाद पुलिस ने अपना रुख नरम किया और हमने पुस्तक बांटना जारी रखा.’

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि परिषद के स्टाल के पास वीएचपी के लोगों का कुछ अति-वाम छात्र कार्यकर्ताओं के साथ भी विवाद हुआ था. छात्रों के एक समूह ने सीएए के खिलाफ मेले के मैदान में रैली निकाली और भाजपा के खिलाफ और शनिवार को पांच प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के खिलाफ नारेबाजी की. पुलिस ने रैली को रोक दिया.

44वें अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले में चलता-फिरता पोस्टबॉक्स आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. बंगाल सर्किल के पोस्टमास्टर जनरल गौतम ने बताया कि भारतीय डाक के स्टाल के बाहर चलता-फिरता मॉडल लोगों को खूब पसंद आ रहा है. खासकर बच्चों के लिए यह आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. उन्होंने बताया कि पुस्तक मेले में लोग पुस्तक खरीद इस चलते-फिरते पोस्टबॉक्स के माध्यम से जिस पते पर चाहें, वहां डाक के माध्यम से पहुंचा सकते हैं.ये भी पढ़ें: RSS नेता भैयाजी जोशी बोले- BJP के विरोध का मतलब हिंदुओं का विरोध नहीं

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First published: February 10, 2020, 8:14 AM IST





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