Home Health Health Care / स्वास्थ्य प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना वायरस मृत्यु दर में कमी नहीं: ICMR

प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना वायरस मृत्यु दर में कमी नहीं: ICMR

प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना वायरस मृत्यु दर में कमी नहीं: ICMR

कोरोना वायरस में प्लाज्मा थेरेपी किस तरह काम करती है जानें (प्रतीकात्मक तस्वीर)

प्लाज्मा थेरेपी (Plasma Therapy) में कोरोना वायरस (Covid 19 Virus) से ठीक हो चुके मरीज के एंटी बॉडी लेकर संक्रमित व्यक्ति में ट्रांसफर कर संक्रमित व्यक्ति में इम्यून सिस्टम मजबूत करने का प्रयास किया जाता है.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    September 9, 2020, 4:17 PM IST

प्लाज्मा थेरेपी (Plasma Therapy) से कोरोना वायरस (Covid 19 Virus) संक्रमितों में मृत्यु दर (Death Rate)की कमी नहीं होती है. इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की एक बहु-केन्द्रित रिसर्च में यह सामने आया है. Covid 19 में प्लाज्मा थेरेपी से इलाज के लिए 22 अप्रैल से 14 जुलाई के बीच भारत के 39 सरकारी और निजी अस्पतालों में ओपन लेबल समानांतर रिसर्च की गई जिसमें प्लाज्मा से मृत्यु दर कम करने में फायदा नहीं होने की जानकारी सामने आई.

प्लाज्मा थेरेपी में कोरोना वायरस से ठीक हो चुके मरीज के एंटी बॉडी लेकर संक्रमित व्यक्ति में ट्रांसफर कर संक्रमित व्यक्ति में इम्यून सिस्टम मजबूत करने का प्रयास किया जाता है. कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद अस्पताल में भर्ती हुए 464 मरीजों पर यह रिसर्च की गई है.

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ICMR द्वारा कोरोना वायरस से लड़ने के लिए बनाई गई नेशनल टास्क फ़ोर्स ने समीक्षा के बाद इस स्टडी को मान्यता दी है. Covid 19 के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 27 जून को क्लिनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल के तहत संक्रमित रोगियों का इलाज प्लाज्मा थेरेपी से करने की अनुमति दी गई थी. स्टडी में यह भी कहा गया है कि डोनर सोशल मीडिया पर कॉल कर रहे हैं और अत्यधिक मूल्य के कारण कालाबाजारी को भी बढ़ावा मिल रहा है.इस स्टडी में कहा गया, ‘प्लाज्मा थेरेपी से Covid 19 की मृत्यु दर में कमी से लेना-देना नहीं है. सीमित लैब क्षमता के साथ इस ट्रायल से प्लाज्मा थेरेपी से वास्तविक जीवन में परिणाम का अनुमान लगाया गया था. अध्ययन के परीक्षण में 464 कोरोना वायरस बीमार भर्ती मरीजों को शामिल किया गया. इनमें 235 व्यक्तियों को प्लाज्मा थेरेपी दी गई. 229 मरीजों को सिर्फ स्टैंडर्ड केयर दी गई. जिन मरीजों को 200 ml प्लाज्मा खुराक दी गई उन्हें ठीक होने में स्टैंडर्ड केयर के मरीजों से 24 घंटे ज्यादा लगे.”

ICMR की सेंट्रल इम्प्लीमेंटेशन टीम इस स्टडी में शामिल थी. इस स्टडी का डाटा विश्लेषण, डिजाइन, समन्वय, रिपोर्ट लिखने का काम आदि की जिम्मेदारी उनकी ही थी. मरीज को इसमें शामिल करना, अस्पतालों का चयन और वास्तविक स्टडी कन्डक्ट करना स्वतंत्र कार्य था जिसमें ICMR शामिल नहीं थी. स्टडी के इन्वेस्टिगेटर भी स्वतंत्र थे और इनमें भी ICMR की भूमिका नहीं थी.

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