Friday, October 30, 2020
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भारत में यहां आलू-प्याज से भी सस्ते हैं काजू, दिल्ली से बस इतनी दूर है ये जगह

भारत में यहां आलू-प्याज से भी सस्ते हैं काजू, दिल्ली से बस इतनी दूर है ये जगह

भारत में यहां आलू-प्याज से भी सस्ते हैं काजू

दिल्ली से महज 12 सौ किलोमीटर दूर आप अपने बजट में काजू (Cashew) खरीद सकते हैं. या यूं कहें कि आलू प्याज के दाम से भी कम दाम में काजू खरीद सकते हैं….

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    October 10, 2020, 12:34 PM IST

काजू (Cashew) एक महंगा मेवा है जिसे खाना और खिलाना वाकई आम आदमी के बजट के बाहर है. आमतौर पर लोग काजू खाने और खरीदने से पहले कई दफा सोचते हैं. वजह है काजू के ऊंचे दाम. आसपास के इलाकों में और दिल्ली में काजू का दाम 800 रुपए प्रति किलो के करीब है. लेकिन दिल्ली से महज 12 सौ किलोमीटर दूर आप अपने बजट में काजू खरीद सकते हैं. या यूं कहें कि आलू प्याज के दाम में काजू खरीद सकते हैं. झारखंड के जामताड़ा जिले में काजू 10 से 20 रुपये प्रति किलो बिकते हैं. बता दें कि जामताड़ा के नाला में करीब 49 एकड़ इलाके में काजू के बागान हैं.

काजू के बागान हैं:
झारखंड के जामताड़ा के नाला में 49 एकड़ में काजू का बगान है. यह बागान ब्लॉक मुख्यालय से 4 किमी की दूरी पर है . डाड़र केवलजोरिया से भंडारकोल तक करीब 5 किलोमीटर में फैला है.

बागान में प्रतिवर्ष हजारों क्विंटल काजू फलता है, लेकिन देखरेख के अभाव में स्थानीय लोगों और राहगीरों का निवाला बन जाता है. आस-पास की महिलाएं और बच्चे कच्चे काजू फल को तोड़कर आलू- प्याज से भी सस्ता 10 से 20 रुपये किलो की दर से बेच लेते हैं.

नाला को काजू का नगर बनाने का था सपना

पूर्व उपायुक्त कृपानंद झा ने नाला को काजू का नगर बनाने का सपना देखा था. उनकी पहल पर निमाई चन्द्र घोष एण्ड कंपनी को मात्र तीन लाख भुगतान पर तीन वर्षों के लिए बागान की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया. उसके बाद से काजू बागान की हालत जस की तस बनी हुई है. तब से इस पर सरकारी आकाओं की टेढ़ी नज़र पड़ी है.

होती रही है काजू प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की मांग

सीओ ने इसके लिए नए सिरे शुरुआत करने की बात कही है. स्थानीय विधायक इसे नाकाफी बता कर नाला में काजू प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की मांग कर रहे है. उन्होंने बताया है कि कई बार विधानसभा में सरकार का ध्यान काजू बागान की ओर आकृष्ट किया गया लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई सार्थक पहल नहीं हुई.

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