Friday, October 30, 2020
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माना जाता है आर्मेनिया से दुनिया भर में गया यह फल, जानिए इस देश की और विशेषताएं

माना जाता है आर्मेनिया से दुनिया भर में गया यह फल, जानिए इस देश की और विशेषताएं

आर्मीनिया खूबानी की जन्मभूमि है. खूबानी को ‘आर्मीनिया का सेब’ भी कहा जाता है. (फोटो- AFP)

आर्मीनिया (Armenia) और अजरबैजान (Azerbaijan) के विदेश मंत्रियों (Foreign Minster) के बीच यह वार्ता रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) के निमंत्रण पर हुई. इस लड़ाई में अब तक कम से कम 200 लोगों की जान गई.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    October 11, 2020, 12:38 PM IST

कई दिनों से एक-दूसरे के खिलाफ युद्ध कर रहे आर्मीनिया (Armenia) और अजरबैजान (Azerbaijan) ने कहा कि वे नागोरनो-काराबाख में संघर्षविराम (Ceasefire) पर सहमत हो गए हैं और यह शनिवार दोपहर से शुरू होगा. दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने एक वक्तव्य में कहा कि संघर्ष-विराम का मकसद कैदियों (prisoners) की अदला बदली करना तथा शवों (dead bodies) को वापस लेना है. इसमें कहा गया कि अन्य बातों पर सहमति बाद में बनेगी.

आर्मीनिया और अजरबैजान के विदेश मंत्रियों (Foreign Minster) के बीच यह वार्ता रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) के निमंत्रण पर हुई.  इस लड़ाई में अब तक कम से कम 200 लोगों की जान गई. लेकिन युद्ध में फंसे आर्मीनिया की स्थिति इतिहास में इतनी बुरी नहीं रही. यह एक गर्व किये जा सकने वाले इतिहास वाला देश है. हम आज आपको आर्मीनिया के बारे में ऐसी ही कुछ बातें बता रहे हैं, जिन पर हर आर्मीनियाई गर्व करता है-

आर्मीनिया दुनिया के सबसे पुराने देशों में से एक है. कहा जाता है कि आर्मीनिया, ईरान, चीन, ग्रीस और जापान जैसे ऐतिहासिक देशों के क्लब में शामिल है, जिन्होंने अपनी हजारों साल पुरानी विरासतें बचाकर रखी हैं. राजा दारी प्रथम के ईसा पूर्व 520 की पांडुलिपियों में भी आर्मीनिया का जिक्र मिलता है. आर्मीनिया का जिक्र 5वीं शताब्दी के ग्रीक लेखक हेरोडोट्स ने भी किया है.

आर्मीनिया पहला देश था, जिसने राज्य के धर्म के तौर पर ईसाईयत को स्वीकार किया था. सन् 301 में ग्रेगरी द इल्यूमिनेटर ने आर्मीनिया को बैप्टाइज किया था, उन्हें आर्मीनिया का पहला ईसाई भी कहा जाता है.

दुनिया का पहला चर्च भी आर्मीनिया में ही बना था. इचमियाडजिन कैथेड्रल दुनिया का पहला आधिकारिक चर्च था. यह चौथी शताब्दी में आर्मीनिया में बनाया गया था. किंवदंतियों के मुताबिक ग्रेगरी द इल्यूमिनेटर आकाश से हथौड़ा लेकर आये और उन्होंने एक जगह चिन्हित कर चर्च बनाने का आदेश दिया. 303 में जब यह आदेश दिया गया, उस समय चर्च की जगह पर प्राचीन पैगन मंदिर था. साल 2000 से इस चर्च को यूनोस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल कर लिया है.

येरेवान दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक है. यह आर्मीनिया की 13वीं राजधानी है. इसकी स्थापना 782 ईपू में राजा अरगिस्टी प्रथम ने की थी. यह शहर रोम से भी 29 साल पुराना है. साल 2018 में येरेवान ने अपनी स्थापना की 2800वीं वर्षगांठ मनाई थी.

दुनिया में अंकगणित की पहली किताब आर्मीनिया के गणितज्ञों ने लिखी थी. यह किताब छठी शताब्दी के गणितज्ञ डेविड द इन्विंसिबल ने लिखी थी. इसका एक सैंपल आज भी रखा हुआ है, जिसे मातेनादारन कहते हैं.

आर्मीनिया खूबानी की जन्मभूमि है. कहा जाता है कि यह फल आर्मीनिया के एशियाई भाग में जन्मा और वहां से इसने यूरोप की यात्रा की. खूबानी को ‘आर्मीनिया का सेब’ भी कहा जाता है.

आर्मीनिया में लोग शतरंज बहुत अच्छा खेलते हैं. आज भी इसके खिलाड़ी दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल हैं. यह अर्मेनिया को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने वाला खेल है. बचपन से ही यहां पर बच्चों को शतरंज का ज्ञान दिया जाता है.

सितंबर, 2008 में आर्मीनिया के अरेनी गांव में दुनिया का सबसे पुराना जूता मिला था. बताया गया था कि इसकी उम्र 5500 साल थी. यह जूता पुराना होने के बावजूद बहुत अच्छी अवस्था में पाया गया था.

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