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म्यूचुअल फंड एसआईपी में अगर हो रहा है बड़ा नुकसान, तो जानिए अब क्या है आपके पास ऑप्शन

नई दिल्ली. कोरोनावायरस (Coronavirus -Covid19) के चलते दुनियाभर में बिजनेस गतिविधियां लगभग बंद पड़ी हैं. इसी वजह से शेयर बाजारों में भारी गिरावट आई है. मार्च में सेंसेक्स 40 फीसदी तक लुढ़क गया. इसका असर म्युचूअल फंड्स (Mutual Funds Return) की इक्विटी स्कीम में हुए निवेश पर भी दिखा है. निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की चिंता सताने लगी है. लेकिन बाजार की तुलना में म्यूचुअल फंड स्कीमों के प्रदर्शन पर गौर करें तो पिछले 5 साल के दौरान ज्यादातर स्कीम्स ने अंडरपरफॉर्म यानी निगेटिव रिटर्न दिया है. हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि घबराने की जरुरत नहीं है. जब-जब शेयर बाजार में इतनी बड़ी गिरावट आई है. तब-तब निवेशकों को अगले तीन में 100 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न मिला है.

म्युचूअल फंड्स का 5 साल से खराब रहा प्रदर्शन जारी- एसएंडपी इंडिसेज वर्सेज एक्टिव (SPIVA) रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2019 तक 5 वर्षों की अवधि में ज्यादातर फंडों ने अंडरपरफॉर्म किया है. यहां गौर करने वाली बात यह है कि ज्यादातर ऐसेट मैनेजमेंट कंपनियां (एएमसी) निवेशकों को यह कहकर लुभाती हैं कि शॉर्ट टर्म के उतार-चढ़ाव से बचने के लिए निवेशकों को मध्यम से लंबी अवधि के लिए पैसा लगाना चाहिए.

SPIVA की स्टडी बताती है कि इक्विटी फंडों में 82.29 फ़ीसदी लार्ज कैप फंड, 78.38 फ़ीसदी इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम फंड (ईएलएसएस) और 40.9 फ़ीसदी मिड-स्मॉल कैप इक्विटी फंडों ने 5 साल में अपने-अपने इंडेक्स की तुलना में अंडरपरफॉर्म किया है.

अगर निवेशक यह सोचते हैं कि 5 साल से अधिक समय के लिए निवेश करने पर उन्हें बेहतर रिटर्न मिलेगा तो उनका यह मानना भी गलत हो सकता है.ये भी पढ़ें-सरकार का बड़ा फैसला- 2.82 करोड़ पेंशनधारकों के लिए जारी हुए 1400 करोड़ रुपये

एसएंडपी डाउ जोंस में ग्लोबल रिसर्च के एसोसिएट डायरेक्टर आकाश जैन कहते हैं कि सक्रिय रूप से मैनेज किए जाने वाले अधिकतर लार्ज कैप इक्विटी फंडों ने खराब प्रदर्शन किया है. दिसंबर 2019 तक 10 साल की अवधि में 64.8 फ़ीसदी लार्ज कैप फंडों का प्रदर्शन बीएसई 100 की तुलना में खराब रहा है.

मिड और स्मॉल कैप फंडों ने शॉर्ट टर्म में दिया है बेहतर रिटर्न- शॉर्ट टर्म में भी स्थिति कुछ अच्छी नहीं लगती. दिसंबर 2019 तक 1 साल की अवधि में देखें तो बीएसई 100, 10.92 फ़ीसदी बढ़ा, जबकि इस दौरान लार्ज कैप इक्विटी फंडों में से 40 फ़ीसदी ने बेंचमार्क की तुलना में कम रिटर्न दिया. मिड और स्मॉल कैटेगरी के फंडों ने बेहतर प्रदर्शन किया है. इनका रिटर्न बीएसई 400 मिड-स्मॉल कैप इंडेक्स की तुलना में बेहतर रहा है, निवेश की अवधि चाहे जो हो.

अब क्या करें- आनंदराठी वेल्थ मैनेजमेंट के डिप्टी CEO फिरोज अजीज कहते हैं कि ऐतिहासिक आंकड़ों को देखें तो इतनी बड़ी गिरावट के बाद म्यूचुअल फंड में अगले तीन साल तक 100 फीसदी तक के रिटर्न मिलते है. इसीलिए इस गिरावट का फायदा उठाया जा सकता है. ऐसे में एसआईपी निवेशकों को यह सलाह देना कि वे एसआईपी टॉप अप करा लें या पहले की तरह जारी रखें, जायज नहीं लग रहा है. बेहतर तरीका यह है कि कम से कम 3 महीने के लिए अपने म्यूचुअल फंड हाउस से बात कर इसे ‘Pause’ कर दें. ऐसा लगता है कि 3 महीने बाद कोरोना के संकट का असर कम होगा. उसके बाद इसे पहले की तरह फिर जारी कर दें.

एसकोर्ट सिक्योरिटी के रिसर्च हेड आसिफ इकबाल कहते हैं कि इस समय बिल्कुल घबराना नहीं है, बल्कि अपने निवेश को बरकार रखना है. लंबी अवधि का मतलब 10 साल या इससे ज्‍यादा होता है, लेकिन आज लंबी अवधि एक हफ्ता बन गई है. पर्सनल फाइनेंस में लॉन्‍ग टर्म यानी लंबी अवधि का मतलब अब भी 10 साल या इससे ज्‍यादा है.

इक्विटी यानी शेयर बाजार और उससे जुड़ी म्युचूअल फंड्स स्कीम में लॉन्‍ग-टर्म इनवेस्‍टमेंट करना ही फायदेमंद होता है. एसआईपी के जरिये डायवर्सिफाइड इक्विटी फंडों में निवेश आपकी लंबी अवधि के लक्ष्‍यों के लिए है.

रिटायरमेंट, आपके बच्‍चे की उच्‍च शिक्षा जैसे लक्ष्‍य काफी दूर हैं. आपको इस पैसे की जरूरत कई सालों के बाद पड़ेगी. ऐसे में अगर आपको अभी सिप से निगेटिव रिटर्न मिल रहा है तो घबराने की क्‍या जरूरत है? खुश हों कि आप निचले स्‍तर पर निवेश कर रहे हैं और ज्‍यादा यूनिटें खरीद रहे हैं.

एसआईपी क्या है
एसआईपी का मतलब (सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान) है. कई निवेशक इसे सिप भी कहते हैं. यह निवेशक को एक निश्चित रकम नियमित रूप से म्यूचुअल फंड की किसी स्कीम में निवेश करने की सुविधा देता है. इस तरह यह म्यूचुअल फंड में निवेश का आसान जरिया है. इसमें आप अपनी कमाई से छोटी रकम निकालकर हर महीने म्यूचुअल फंड की यूनिट्स खरीदते हैं. कुछ साल तक नियमित रूप से किया गया निवेश बाद में बड़ा निवेश बन जाता है.

आपको ऐसे होता है फायदा
आप एक साल, दो साल, पांच साल या लंबी अवधि के लिए म्यूचुअल फंड की किसी स्कीम में एसआईपी के जरिए निवेश कर सकते हैं. निवेश की पहली किस्त की रकम से म्यूचुअल फंड कंपनी आपको स्कीम की यूनिट्स आवंटित कर देती है. आपको मिलने वाली यूनिट्स की संख्या यूनिट की नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) पर निर्भर करती है.

आसान शब्दों में समझें
मान लीजिए पहले महीने आपने एसआईपी के जरिए 1000 रुपये का निवेश किया है. आपने जिस स्कीम में निवेश किया है, उसकी एक यूनिट की कीमत 20 रुपये है तो आपको म्यूचुअल फंड कंपनी 50 से थोड़ी कम यूनिट्स आवंटित कर देगी. आपको 50 यूनिट्स इसलिए नहीं मिलेंग, क्योंकि एसेट मैनेजमेंट कंपनी फंड के प्रबंधन के लिए थोड़ा पैसा आपसे वसूलती है, जिसे एक्सपेंस रेशियो कहते हैं. जैसे-जैसे आप निवेश करते जाते हैं, वैसे-वैसे आपके यूनिट्स की संख्या बढ़ती रहती है. आर्क प्राइमरी एडवाइजर्स के डायरेक्टर हेमंत बेनिवाल कहते हैं कि एसआईपी में जैसे ही पैसा डालते हैं, वह पैसा निवेश के लिए चला जाता है. इसलिए आपका पैसा ज्यादा समय तक निवेशित रहता है.

गिरावट पर मिलता है फायदा
एसआईपी के जरिए म्यूचुअल फंड की स्कीम में निवेश करने से यूनिट्स की औसत खरीद मूल्य कम आती है. इसे कॉस्ट एवरेजिंग मेथड कहते हैं. यह क्या है? दरअसल शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहता है. आपको नहीं पता कि बाजार कब ऊपर जाएगा और कब नीचे. एसआईपी में हर महीने लगाए गए आपके पैसे से म्यूचुअल फंड कंपनी शेयर या दूसरी सिक्योरिटी खरीदती है.

इस तरह जब शेयर की कीमत कम रहती है तो आपको ज्यादा यूनिट मिलते है. जब शेयर की कीमत ज्यादा रहती है तो आपको कम यूनिट मिलती हैं. इस तरह अगर एक साल की अवधि में देखें तो औसत खरीद मूल्य अपेक्षाकृत कम रहता है. इसे कॉस्ट एवरेजिंग बेनेफिट कहते हैं. आर्क प्राइमरी एडवाइजर्स के डायरेक्टर हेमंत बेनिवाल कहते हैं यह एसआईपी से निवेश की सबसे बड़ी खूबी है, क्योंकि आपको पता नहीं लगा सकते कि बाजार कब चढ़ेगा और कब गिरेगा.

निवेश में अनुशासन
एसआईपी से निवेश करने का एक बड़ा फायदा यह है कि यह निवेश के मामले में आपको अनुशासित रखता है. हर महीने आपको बैंक खाते से निश्चित रकम म्यूचुअल फंड कंपनी को चली जाती है. बेनिवाल कहते हैं कि एसआईपी आपने खोल लिया तो कभी जरूरत से ज्यादा खर्च नहीं करेंगे. आपको पता है कि निश्चित रकम तय तारीख को हर महीने आपके खाते से निकलकर म्यूचुअल फंड कंपनी को जाएगी. इस तरह निवेश में अनुशासन बना रहता है.

अगर आप एकमुश्‍त या सिप की राशि बढ़ाकर ज्‍यादा निवेश करने के बारे में सोच रहे हैं तो ऐसा तभी करें अगर आपके वित्‍तीय लक्ष्‍य काफी दूर हों. केवल इसलिए निवेश नहीं करें कि बाजार अभी नीचे है. कोई भी निवेश घबराहट में नहीं करें. फिर चाहे वह शेयरों की बिक्री से जुड़ा हो या इनकी खरीदारी से.

अभी हम युद्ध जैसी स्थिति में हैं. याद रखें कि आपने अच्‍छे समय में जो कुछ सीखा है, उसे अब लागू करने का समय आ गया है. उदाहरण के लिए आपने शांत‍ि के समय सीखा है कि इक्विटी म्‍यूचुअल फंड लंबी अवधि के लिए होते हैं. आपने गिरावट के दौर में शांत रहना सीखा है. प‍हले भी गिरावट आई है. हम गिरावट के दौर में हैं. आगे भी गिरावट आएगी. यह किसी अर्थव्‍यवस्‍था के साथ जुड़ा हुआ पहलू है. इसलिए बुनियादी बातों से जुड़े रहें. अपना ध्‍यान रखें.

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