विशेषज्ञ बोले- इस बार दिल्ली के प्रदूषण को कम नहीं होने देगी ये बड़ी वजह

एयर क्वालिटी इंडेक्स के अनुसार दिल्ली में दिवाली के बाद लोधी रोड इलाके में पीएम 2.5 गंभीर कैटेगिरी में पहुंच गया है. (प्रतीकात्‍मक फोटो)

दिल्ली (Delhi) में वायु प्रदूषण (Air Pollution) पर मौसम विज्ञान के जानकारों का कहना है कि इस बार हवाओं की गति (Wind Speed) के कारण संकट गहराने की आशंका है.

  • News18Hindi
  • Last Updated:
    October 28, 2019, 9:48 AM IST

नई दिल्ली. दिवाली (Diwali) के चलते दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में हवा (Air) की गुणवत्ता एक बार फिर खराब होने लगी है. यह बात अलग है कि इस बार दिल्ली का दम घोटने में आतिशबाजी का रोल कम है. यह खुलासा खुद मौसम विज्ञान विभाग के विशेषज्ञ कर रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल दिल्ली की हवा को बिगाड़ने में मौसम का बदलता रुख बड़ा कारण बन रहा है.

हवाओं का रुख बदलने और गति धीमी पड़ने से वातावरण में मौजूद प्रदूषण के कारक बने रहते हैं. हवा की गति तेज होने पर प्रदूषण वाले कण हट जाते हैं. एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) के अनुसार, दिल्ली में दिवाली के बाद बढ़ते प्रदूषण का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लोधी रोड इलाके में पीएम 2.5 गंभीर कैटेगिरी (500) में पहुंच गया है.

दिवाली से दो दिन पहले ही बदला था हवाओं का मिजाज

24 अक्टूबर से दिल्ली-एनसीआर की हवाओं का मिजाज बदलना शुरू हो गया था. इससे पहले दिल्ली-एनसीआर में उत्तर पश्चिमी हवाएं चल रही थीं, जबकि बदलाव के बाद अब हवाओं का रुख पूर्व की ओर हो गया है. वहीं, एयर स्पीड में भी बदलाव आ गया है. 25 अक्टूबर से हवाओं की स्पीड लगातार घट रही है. दिवाली के बाद 30 अक्टूबर तक हवा की अधिकतम स्पीड 10 किमी प्रति घंटा तक रह सकती है. परेशानी की बात यह है कि हवा की इतनी कम गति प्रदूषणकारी (पार्टिकुलेट मैटर) तत्वों को अपने साथ बहा ले जाने में कारगर साबित नहीं होती है.पश्चिमी विक्षोभ का असर खत्म होना भी बड़ा कारण

उत्तर के हिमालयी क्षेत्र से बहने वाली उत्तर पश्चिम हवाएं दिल्ली सहित उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में सर्द मौसम का कारण बनती हैं. जानकारों के अनुसार, इसी को पश्चिमी विक्षोभ कहा जाता है. पश्चिमी विक्षोप ही दिवाली के आसपास दिल्ली को प्रदूषण से राहत देता है.

इसी समय पंजाब-हरियाणा में जलने वाली पराली के धुंए को हवा के साथ बहा ले जाने में मददगार होती है. विक्षोभ का असर खत्म होने के बाद 23 अक्टूबर की रात से एक बार फिर पूर्वी हवा का रुख दिल्ली एनसीआर क्षेत्र की तरफ होने के कारण दिवाली के समय दमघोटू हवाओं से निपटने में मौसम का साथ मिलने की उम्मीद कम हो गई थी.

सर्दियों के मौसम में गहराता है संकट
हर साल बारिश खत्म होने और सर्दी के चरम पर पहुंचने के दौरान अक्टूबर और मध्य नवंबर तक दिल्ली में वायु प्रदूषण का संकट गहराता है. इसकी दो मुख्य वजहें हैं. पहला, पंजाब और हरियाणा की पराली का धुआं. दूसरा, दिल्ली एनसीआर में वाहनों एवं विकास परियोजनाओं से उड़ने वाली धूल और धुआं. ऐसे में उत्तर पश्चिमी हवाओं की गति 20 किमी प्रति घंटा तक होने पर पार्टिकुलेट मैटर वायुमंडल में ठहरने के बजाय हवा के साथ दिल्ली से आगे निकल जाते हैं. इससे स्पष्ट है कि मौसम के मिजाज की दिल्ली के वायु प्रदूषण में प्रभावी भूमिका है.

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First published: October 28, 2019, 8:29 AM IST





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