सुप्रीम कोर्ट

AGR वसूली मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के आदेश में हस्तक्षेप करने के कारण डेस्क अधिकारियों को समन जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कंपनियों और डेस्क ऑफिसर्स के खिलाफ अवमानना के लिए ऐक्शन लिया जाएगा.

News18Hindi
Last Updated:
February 14, 2020, 12:36 PM IST

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने टेलीकॉम कंपनियों से समायोजित सकल राजस्व यानी एजीआर (Adjusted Gross Revenue) वसूली के मामले में टेलीकॉम कंपनियों और सरकार को कड़ी फटकार लगाई है. टेलीकॉम कंपनियों ने AGR का बकाया चुकाने के लिए मोहलत मांगी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आगे मोहलत देने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा, ‘जो आदेश देना था दे दिया गया है. टेलीकॉम कंपनियों को पैसा चुकाना ही होगा.’ जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच ने कहा कि यह अवमानना (Contempt of Court) का मामला है, क्या हमें अब सुप्रीम कोर्ट को बंद कर देना चाहिए? अदालत ने सरकार और टेलीकॉम कंपनियों को नोटिस भी जारी किया है.अदालत ने और क्या कहा? जस्टिस अरुण मिश्रा ने याचिकाओं पर नाराजगी जताते हुए कहा, ‘ये याचिकाएं दाखिल नहीं करनी चाहिए थीं. ये सब बकवास है. क्या सरकारी डेस्क अफसर सुप्रीम कोर्ट से बढ़कर है जिसने हमारे आदेश पर रोक लगा दी. अभी तक एक पाई भी जमा नहीं की गई है. हम सरकार के डेस्क अफसर और टेलीकॉम कंपनियों पर अवमानना की कार्रवाई करेंगे. क्या हम सुप्रीम कोर्ट को बंद कर दें ? क्या देश में कोई कानून बचा है? क्या ये मनी पॉवर नहीं है?’मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने के कारण डेस्क अधिकारियों को समन जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कंपनियों और डेस्क ऑफिसर्स के खिलाफ अवमानना के लिए ऐक्शन लिया जाएगा. कोर्ट की अवमानना के मामले में कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर को समन जारी किया गया है. मामले की सुनवाई अब 17 मार्च को होगी. उसी दिन कंपनियों के एमडी को कोर्ट के सामने उपस्थित होना होगा.सुप्रीम कोर्ट ने पहले क्या दिया था आदेश?
पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को टेलीकॉम कंपनियों से एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) के विवाद से संबंधित 92000 करोड़ रुपये वसूलने की इजाजत दे दी थी. इसके तहत कंपनियों को जुर्माने के साथ साथ ब्याज भी चुकाना पड़ेगा. अदालत ने गुरुवार को फैसला देते हुए दूरसंचार विभाग द्वारा तय एजीआर की परिभाषा को बरकरार रखा था. एजीआर वसूले जाने से राहत दिए जाने को लेकर टेलीकॉम कंपनियों ने अदालत में अपील की थी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था. साथ ही यह भी कहा था कि इस मामले में अब और मुकदमेबाजी नहीं होगी. बकाया भुगतान की गणना के लिए समय अवधि तय की जाएगी.क्या है मामला?दरअसल, टेलीकॉम कंपनियों को सुप्रीम कोर्ट ने 23 जनवरी तक पूरी राशि चुकाने का आदेश दिया था. इससे राहत पाने के लिए कंपनियों ने कोर्ट में संशोधन याचिका दाखिल की थी. इसी पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने ये आदेश सुनाया है. इससे पहले भी 6 जनवरी को टेलीकॉम कंपनियों को उस वक्त बड़ा झटका लगा था जब सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया था. कोर्ट के फैसले के मुताबिक 23 जनवरी तक टेलीकॉम कंपनियों को बकाया चुकाना था.22 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियों भारती एयरटेल, वोडा- आइडिया और टाटा टेलीसर्विसेज ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी. याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया कि पीठ 24 अक्तूबर 2019 के उस फैसले पर फिर से विचार करे जिसमें गैर दूरसंचार आय को भी AGR में शामिल किया गया है. इस फैसले से टेलीकॉम कंपनियों को केंद्र को करीब 1.33 लाख करोड रुपये चुकाने हैं.



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