• नया कैंपस 9.5 एकड़ में फैला है, एफिल टावर से 2.5 गुना ज्यादा स्टील लगी
  • 300 से ज्यादा पेड़, 8.5 लाख लीटर पानी रिसाइकल की क्षमता वाला प्लांट
  • यूएस के सिएटल में स्थित अमेजन के हेडक्वार्टर में कर्मचारियों की क्षमता 5 हजार है

Dainik Bhaskar

Aug 21, 2019, 07:07 PM IST

हैदराबाद. अमेजन ने यहां अपने सबसे बड़े कैंपस का बुधवार को उद्घाटन किया। इसमें 15,000 कर्मचारी काम करेंगे। कैंपस 9.5 एकड़ में फैला है। कंस्ट्रक्शन एरिया 30 लाख स्क्वायर फीट है। इमारत में एफिल टावर से 2.5 गुना ज्यादा स्टील लगी है। कुल क्षेत्र के लिहाज से यह दुनिया में अमेजन की सबसे बड़ी इमारत है। कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट (ग्लोबल रिएल एस्टेट एंड फैसिलिटीज) जॉन शॉएटलर ने यह जानकारी दी। यह पता नहीं चल पाया कि नए कैंपस के निर्माण में कितना खर्च हुआ।

4500 कर्मचारी नए कैंपस में शिफ्ट हुए

  1. शॉएटलर ने बताया कि हैदराबाद में 40 लाख स्क्वायर फीट ऑफिस स्पेस में कंपनी की 8 इमारतें हैं। वहां से कुछ कर्मचारियों को नए कैंपस में शिफ्ट किया जा रहा है। अब तक करीब 4,500 कर्मचारी शिफ्ट किए जा चुके हैं। नए कैंपस के जरिए अमेजन का भारत में टैलेंट पर फोकस मजबूत होगा। भारत में कंपनी के 62 हजार फुल टाइम कर्मचारी हैं।

  2. अमेजन इंडिया के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और कंट्री मैनेजर अमित अग्रवाल के मुताबिक हैदराबाद का नया कैंपस अमेजन के सिएटल (यूएस) स्थित हेडक्वार्टर के बाद सबसे बड़ा टेक्नोलॉजी बेस भी है। यहां सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट इंजीनियर, मशीन लर्निंग साइंटिस्ट, प्रोडक्ट मैनेजर, फाइनेंस और कई दूसरे कामों से जुड़े कर्मचारी हैं।

  3. नए कैंपस में 300 से ज्यादा पेड़ लगे हैं। इनमें तीन विशेष पेड़ 200 साल पुराने हैं। 8.5 लाख लीटर पानी रिसाइकल की क्षमता वाला प्लांट भी है। अमेजन ने 30 मार्च 2016 को इस कैंपस का निर्माण शुरू किया था। 39 महीने तक हर दिन औसत 2 हजार कर्मचारियों ने काम किया। अमेजन भारत में नई सुविधाओं पर फोकस कर रही है। यहां अमेजन का मुकाबला वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली फ्लिपकार्ट से है। अमेरिकी रिटेलर वॉलमार्ट ने पिछले साल फ्लिपकार्ट को खरीदा था।

  4. अमित अग्रवाल ने अमेजन के वायदे को दोहराते हुआ कहा कि कंपनी भारत में 5 अरब डॉलर का निवेश करने का ऐलान पहले ही कर चुकी है। हम सभी बिजनेस सेगमेंट में इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं। अग्रवाल ने कहा कि भारत में अमेजन के बिजनेस में कोई मंदी नहीं है। कुल रिटेल में ई-कॉमर्स की सिर्फ 3% हिस्सेदारी है। इतना कम शेयर होने पर ग्रोथ के लिए काफी मौके रहते हैं।


     


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