25 मार्च, बुधवार से नवरात्रि आरंभ हो रही हैं। नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा- उपासना की जाती है। चैत्र मास के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होकर रामनवमी तक मां दूर्गा का पावन पर्व नवरात्रि मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि में शक्ति के नौं रुपों की पूजा करने से सभी तरह की समस्याएं दूर हो जाती हैं और जीवन में सुख, शांति आ जाती है। नवरात्रि के पहले दिन मां के शैलपुत्री रूप की पूजा होती है। नवरात्रि के नौ दिन तक व्रत- उपवास, पूजा-पाठ और सुबह शाम की आरती जरूर की जाती है। आइए जानते हैं इस नवरात्रि मां दुर्गा की आरती जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी….

दुर्गाजी की आरती
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
जय अम्बे गौरी
माँग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्जवल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥
जय अम्बे गौरीकनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥जय अम्बे गौरीकेहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥जय अम्बे गौरीकानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥जय अम्बे गौरीशुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥जय अम्बे गौरीचण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥जय अम्बे गौरीब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी।आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥जय अम्बे गौरीचौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूँ।बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥जय अम्बे गौरीतुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।भक्तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥जय अम्बे गौरीभुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी॥जय अम्बे गौरीकन्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥जय अम्बे गौरीश्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥जय अम्बे गौरी



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here