• अगर कोई कोरोना की आयुर्वेदिक दवा का दावा करे तो उससे कहें आयुष मंत्रालय से सम्पर्क करें,बिना सरकारी मान्यता प्राप्त दवाएं मत लें
  • लॉकडाउन के कारण ही कोरोना के मामले दूसरे देशों के मुकाबले काफी कम हैं, इसलिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें

दैनिक भास्कर

Apr 29, 2020, 04:02 PM IST

नई दिल्ली. क्या इलाज के बाद कोरोना का संक्रमण दोबारा हो सकता है और जिनमें लक्षण नहीं हैं वो कैसे पता करें और डॉक्टर के पास कब जाएं…. ऐसे कई सवालों के जवाब इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व महासचिव डॉ. नरेंद्र सैनी ने दिए हैं। जिसे आकाशवाणी ने जारी किया है। जानिए कोरोनावायरस से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब….

सवाल : क्या कोरोना के मरीज को दोबारा संक्रमण हो सकता है?
दोबारा संक्रमण को लेकर असमंजस है। साउथ कोरिया में ऐसा मामला सामने आया था लेकिन यह कहना मुश्किल है कि अभी जिन मरीजों में दोबारा संक्रमण हुआ वो पूरी तरह ठीक हुए थे या नहीं। हमारे देश में अभी ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। अगर कोई ठीक हो गया है तो भी बचाव के सभी उपाय अपनाएं। लोगों को उनसे फिजिकल डिस्टेंस बनाना है न कि सोशल डिस्टेंस।

क्या प्लाज्मा थैरेपी से कोरोना का हर मरीज ठीक हो जाता है?
कोरोनावायरस की कोई भी दवा अभी तक नहीं है, इसलिए इस वायरस का इलाज अलग-अलग वैज्ञानिक तरीकों से किया जा रहा है। उसी में से एक है प्लाज्मा थैरेपी। पहले कई बीमारियों में इसका प्रयोग हो चुका है। परिणाम अच्छे दिखे थे। थैरेपी में संक्रमण से मुक्त हो चुके लोगों के रक्त से प्लाज्मा निकालकर गंभीर रूप से संक्रमित मरीज को दिया जाता है। लेकिन जरूरी नहीं कि यह विधि सभी के लिए एक समान काम करे। हां, जब तक कोई दवा नहीं आती जब तक डॉक्टर इस पद्धति का सहारा लेते रहेंगे।

क्या कोरोना ने अपना रूप बदल लिया है?
कोरोनावायरस नवम्बर में सामने आया, उसके बाद दूसरे देशों में पहुंचा। अब हर जगह यह वायरस थोड़े-थोड़े बदलाव के साथ पहुंच रहा है। इसलिए इससे घबराने की जरूरत नहीं है। हर किसी के लक्षण में थोड़ा अंतर हो सकता है। ये कोई भयानक रूप नहीं ले रहा है। बस, इस बात का ध्यान रखना है कि यह एक-दूसरे से फैलने वाली बीमारी है और इससे बचाव के लिए भी सावधानी का पालन करना जरूरी है।

लॉकडाउन को एक महीने से अधिक हो गया फिर भी कोरोना के मरीज क्यों बढ़ रहे हैं?
किसी को इस वायरस के बारे में नहीं पता था। सरकार ने लॉकडाउन लगाकर सबको इस वायरस के प्रति जागरूक किया और इसकी गंभीरता बताई। लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जिन्होंने इसे नहीं माना। कई लोग भीड़ के बीच जाते रहे, आयोजन करते रहे। इस दौरान कई लोग लॉकडाउन के बावजूद संक्रमित हुए। वे अब सामने आ रहे हैं। यह याद रखें कि लॉकडाउन के कारण ही लोग भारी संख्या में सुरक्षित हैं। दूसरे देशों की तुलना में हमारे देश में न तो संक्रमण ज्यादा है और न मौत का आंकड़ा।

जिनमें लक्षण नहीं है वो कैसे पता करें और डॉक्टर के पास कब जाएं?
जिनमें लक्षण नहीं दिख रहे हैं, उन्हें इस बात का अहसास नहीं होगा कि वायरस का संक्रमण है या नही। इसलिए खुद को बचाना और एहतियात बरतना जरूरी है। इसके अलावा अगर आपके पास कोई भी संक्रमित मरीज पाया गया तो आप खुद ही अस्पताल जाएं और डॉक्टर को बताएं कि आपके आसपास मरीज मिला है। इससे सरकार और डॉक्टर को आपकी और आपके संपर्क में आए लोगों की जांच करने में आसानी होगी। इसके साथ ही सभी एक सुरक्षित दूरी बनाकर रखें।

अगर कोई कोरोना की आयुर्वेदिक दवा का दावा करता है तो क्या करें?
ये नया वायरस है, इसलिए अभी तक किसी भी देश में इसकी दवा या वैक्सीन नहीं तैयार की है। तमाम देश वैक्सीन के लिए शोध कर रहे हैं। अगर कोई कहता है कि उसके पास आयुर्वेद की कोई दवा है तो उससे कहिए आयुष मंत्रालय से सम्पर्क करें। हर दवा या पद्धति का इस्तेमाल वैज्ञानिक शोध में सफल होने के बाद किया जाता है। बिना सरकारी मान्यता प्राप्त दवाएं मत लें। किसी तरह की भ्रामक दवाई न खुद खाएं और न किसी को बताएं। भारत भी अगर कोई दवा बनाता है तो डब्ल्यूएचओ के विचार विमर्श के बाद ही प्रयोग में लाएगा।



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