Monday, October 19, 2020
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FD नहीं बल्कि यहां करें निवेश, हर महीने होगी मोटी कमाई, टैक्स भी है बेहद कम

नई दिल्ली. मौजूदा आर्थिक हालात के लिहाज से देखें तो निकट भविष्य में ब्याज दरों में बढ़ोतरी के मौके नहीं बनते दिखाई दे रहे हैं. ऐसे में एक स्मार्ट निवेशक (Smart Investment) के तौर पर आपको बचत के अन्य विकल्पों पर सावधानी से ध्यान देना होगा. बढ़ते महंगाई दर के लिहाज से फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposit) एक बेहतर विकल्प नहीं है. ऐसे में अगर आप लंबे समय में निवेश से मोटी कमाई करना चाहते हैं तो आपके लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड्स (Mutual Funds) एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है. टैक्स से लेकर अधिक रिटर्न के मामले में यह फिक्स्ड डिपॉजिट से बेहतर विकल्प है. आइए तुलनात्मक रूप से जानते हैं इन दोनों विकल्पों के बारे में…

रेग्युलर इनकम के लिए क्या है एफडी का गणित
सबसे पहले बात करते हैं फिक्स्ड​ डिपॉजिट के बारे में. मान लीजिए कि आपके पास 1 करोड़ रुपये की बचत है और आप इससे रेग्युलर इनकम (Regular Income) करना चाहते हैं. बैंक ​FD के जरिए 1 साल में यह रकम 1.07 करोड़ रुपये ही हो सकेगी. कुल मिलाकर इससे आपको 7 लाख रुपये की कमाई हुई, यानी 58,000 हजार रुपये प्रति महीना. अब अगर महंगाई दर (Inflation) 5 फीसदी है तो 1 करोड़ रुपये की बचत बनाए रखने के लिए आपको 1.05 करोड़ रुपये निवेश करना होगा. इसके बाद आपके पास 2 लाख रुपये ही बच सकेंगे, जो कि प्रति माह केवल 16,666 रुपये ही हुए. इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि अगर आपको अपने बचत से हर महीना 50 हजार रुपये कमाना है तो इसके लिए 3 करोड़ रुपये का FD कराना होगा. अब यहां आपको इनकम टैक्स (Income Tax) की भी चिंता होगी, जो कि 3 करोड़ रुपये पर 30 हजार सालाना टैक्स होगा.

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कैसे बेहतर है म्यूचुअल फंड
लेकिन, हाइब्रिड म्यूचुअल फंड (Hybrid Mutual Fund) के मामले में यह स्थिति बिल्कुल अलग है. यहां पर आप अपना ब्याज रिसीव करने की जगह अपने इन्वेस्टमेंट से कमाई कर रहे हैं. डिपॉजिट के विपरित यह अधिक इनकम का जरिया है, लेकिन यह वोलेटाइल भी है. एक साल में हाइब्रिड म्यूचुअल फंड में रिटर्न कम या अधिक हो सकता है, लेकिन पांच साल ​की अवधि में आपको महंगाई दर को पार करते हुए आसानी से 6-7 फीसदी का लाभ होगा. उदाहरण के तौर पर देखें तो बीते पांच साल में अधिकतर इक्विटी फंड्स ने 12-14 फीसदी का रिटर्न दिया है. किसी एक साल में भले ही इन रिटर्न्स में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है.

 

हर महीने 50 हजार कमाने के लिए नहीं होगी 3 करोड़ की जरूरत
इस तरह के म्यूचुअल फंड्स में आप सालाना 4 फीसदी की निकासी कर सकते हैं. इसके अतिरिक्त, इस पर बेहद कम टैक्स देय है. आपके विड्रॉल यानी निकासी पर आपको कैपिटल गेन्स टैक्स (LTCG) देना होगा. अगर आप 1 साल से अधिक समय के लिए इन्वेस्टमेंट करते हैं तो आपको 10 फीसदी ही टैक्स देना होगा. अगर आप 50 हजार रुपये प्रति माह का रेग्युलर इनकम चाहते हैं तो आपका काम 3 करोड़ रुपये की जगह 1.5 करोड़ रुपये ही बन जाएगा. खास बात है कि आपका रिटर्न चाहें जितना भी होगा, टैक्स तो 10 फीसदी का ही लगेगा.

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कैसे बचेगा आपका टैक्स
हालांकि, इस टैक्स लाभ का एक और फैक्टर है. मान लीजिए आपने 10 लाख रुपये म्यूचुअल फंड में निवेश किया है. एक साल बाद यह रकम बढ़कर 10.80 लाख रुपये हो गया. अब अगर आप 80 हजार रुपये विड्रॉ करना चाहते हैं. आपकी कुल ​होल्डिंग में 7.4 फीसदी का लाभ हुआ है और बाकी 92.6 फीसदी आपके द्वारा निवेश किया गया रकम है. अब जब आप कोई भी रकम विड्रॉ करते हैं तो टैक्स के लिए आपे रिटर्न और निवेश की रकम को इसी अनुपात में कैलकुलेट किया जाएगा. इस प्रकार 80 हजार रुपये की निकासी पर आपका गेन केवल 5,926 रुपये ही बनता है और इसी रकम पर आपको टैक्स देना होगा.

कुल मिलाकर देखें तो हर तरीके से इक्विटी म्यूचुअल फंड से रेग्युलर विड्रॉल आपके लिए बेहतर साबित हो सकता है. खासकर, ब्याज से होने वाली कमाई के लिहाज से. रेग्युलर विड्रॉल के लिए सिस्टेमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP) भी उपलब्ध होते हैं. आपके एक बात का खास ध्यान देना होगा कि छोटी अवधि में यह वोलेटाइल होता है यानी बाजार की जोखिम पर अधिक निर्भर रहता है.

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