• मेवाड़ के पूर्व महाराज महेंद्र सिंह मेवाड़ ने कहा है कि हमारा राजघराना राम के पुत्र लव का वंशज
  • जयपुर के राजपरिवार का श्रीराम के बड़े बेटे कुश के नाम पर ख्यात कच्छवाहा/कुशवाहा वंश के वंशज होने का दावा

Dainik Bhaskar

Aug 12, 2019, 12:30 PM IST

जयपुर. सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद की सुनवाई के दौरान श्री राम के वंशजों के बारे में सवाल पूछा था। इसके बाद राजस्थान में कई लोगों ने राम के वंश होने का दावा किया। जयपुर राजघराने की दीयाकुमारी ने खुद को श्री राम के बड़े बेटे कुश के वंशज होने का दावा किया था। अब मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार ने भी लव का वंशज होने का दावा किया है।

 

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। 9 अगस्त को कोर्ट ने रामलला के वकील से पूछा था- क्या भगवान राम का कोई वंशज अयोध्या या दुनिया में है? इस पर वकील ने कहा था- हमें जानकारी नहीं।

 

मेवाड़ राजघराने ने बताया 76 पीढ़ियों का इतिहास

मेवाड़ के पूर्व महाराज महेंद्र सिंह मेवाड़ ने कहा है कि हमारा राजघराना राम के पुत्र लव का वंशज है। मेवाड़ में उनकी 76 पीढ़ियों का इतिहास दर्ज है। मेवाड़ राजघराने के ही लक्ष्यराज ने बताया कि कर्नल जेम्स टार्ड की पुस्तक के मुताबिक लव के वंशज कालांतर में गुजरात होते हुए आहाड़ यानी मेवाड़ में आए और यहां सिसोदिया साम्राज्य की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि श्रीराम भी भगवान शिव के उपासक थे और मेवाड़ राजपरिवार भी एक लिंगनाथ (शिवजी) का उपासक है।

 

‘विजेता प्रताप’ के लेखक प्रो. चंद्र शेखर शर्मा का कहना है कि मेवाड़ राजपरिवार का राज प्रतीक सूर्य है और वे शिव उपासक हैं। ये दोनों समानताएं श्रीराम के वंशज में भी रही हैं। चतुर चिंतामणि ने भी महाराणा प्रताप को श्रीराम का वंशज और रघुवंशी लिखा है।

 

राम के वंशज राघव राजपूत होने का दावा

कांग्रेस के प्रवक्ता सत्येंद्र सिंह राघव ने दावा किया है कि राम के वंशज राघव राजपूत हैं। श्री राघव ने बाल्मीकि रामायण के पृष्ठ संख्या 1671 का उल्लेख किया है, जिसमें राम की वंशावली की जानकारी है। श्री राघव ने बताया कि राम के पुत्र लव से राघव राजपूतों का जन्म हुआ जिनमें बगुर्जर, जयात और सिकरवारु का वंश चला, जबकि कुश से कुशवाह राजपूतों का वंश चला।

 

दीयाकुमारी ने श्रीराम के वंशज होने के सबूत दिए

जयपुर के राजपरिवार का कहना है कि वे भगवान राम के बड़े बेटे कुश के नाम पर ख्यात कच्छवाहा/कुशवाहा वंश के वंशज हैं। यह बात इतिहास के पन्नों में दर्ज है। पूर्व राजकुमारी दीयाकुमारी ने इसके कई सबूत भी दिए हैं। उन्होंने एक पत्रावली दिखाई है, जिसमें भगवान श्रीराम के वंश के सभी पूर्वजों का नाम क्रमवार दर्ज हैं। इसी में 289वें वंशज के रूप में सवाई जयसिंह और 307वें वंशज के रूप में महाराजा भवानी सिंह का नाम लिखा है। इसके अलावा पोथीखाने के नक्शे भी हैं।

 

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