Dainik Bhaskar

Feb 09, 2020, 01:07 PM IST

लाइफस्टाइल डेस्क. अपेंडिक्स में सूजन यानी अपेंडिसाइटिस एक आम समस्या है। हालांकि इसको लेकर थोड़ी-सी लापरवाही या लेटलतीफी कई बार गंभीर रूप धारण कर लेती है, जो जानलेवा भी हो सकती है। इसलिए इसका तत्काल इलाज करवाना जरूरी होता है।

क्या होता है अपेंडिक्स?
सामान्यतः यह एक वेस्टिजियल अंग है जो छोटी और बड़ी आंत के जोड़ पर पाया जाता है। वेस्टिजियल अंग का मतलब है ऐसा अंग जिसका शरीर के लिए वैसे कोई महत्व नहीं है। यानी हम इसके बगैर भी सामान्य जीवन जी सकते हैं। यह केंचुए के आकार जैसा होता है। सामान्यतः इसकी लंबाई 7 से 10 सेंटीमीटर तक होती है।

क्यों होती है सूजन?
अपेंडिक्स में सूजन को अपेंडिसाइटिस कहा जाता है। यह दो कारणों से हो सकती है। एक, इंफेक्शन के कारण और दूसरी, अपेंडिक्स में कुछ फंसने के कारण। डाइट में फाइबरयुक्त पदार्थों की कमी भी इसकी एक अन्य मुख्य वजह होती है। आंत के कैंसर की वजह से भी अपेंडिसाइटिस हो सकता है। वैैसे यह समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन 10 से 30 वर्ष की उम्र के दौरान इसकी आशंका ज्यादा होती है।

सूजन के लक्षण
इसका सबसे बड़ा संकेत है पेट के दाहिनी तरफ निचले हिस्से में दर्द होना। आमतौर पर यह दर्द नाभि के आसपास शुरू होता है और बाद में दाहिनी तरफ पहुंच जाता है। यह दर्द मामूली से लेकर अत्यंत असहनीय और पीड़ादायक हो सकता है। दर्द खांसने या हंसने पर बढ़ जाता है। प्रेग्नेंसी के दौरान इसका दर्द पेट के ऊपरी हिस्से में होता है।
पेट दर्द के अलावा इनमें से कुछ या कोई एक लक्षण भी हो सकता है – पेट फूलना, उल्टियां होना, अपच, जी मिचलाना, भूख न लगना, कब्जियत, पेशाब में जलन और कभी-कभार खून आना, चलने में परेशानी होना।

ये लक्षण दिखें तो क्या करें?
इन लक्षण या जटिलता के होने पर तुरंत अपने डॉक्टर या सर्जन से संपर्क करें। डॉक्टर अपेंडिसाइटिस की पुष्टि के लिए ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट और सोनोग्राफी करवा सकता है। जरूरी होने पर वह सीटी स्केन या एमआरआई भी करवाने को कहता है। अगर अपेंडिक्स में सूजन की पुष्टि होती है, तो तुरंत ऑपरेशन करवाना जरूरी होता है।

अपेंडिक्स का स्थाई इलाज ऑपरेशन ही है। ऑपरेशन करके अपेंडिक्स को निकाल दिया जाता है। ऑपरेशन नहीं करवाने पर अपेंडिक्स में बार-बार सूजन आने का खतरा बना रहता है और इसके फूटने की आशंका भी बढ़ जाती है। अपेंडिक्स के फूटने पर उसका इंफेक्शन पूरे पेट में फैल जाता है, जो जानलेवा सिद्ध हो सकता है।

ऑपरेशन विधि
अपेंडिसाइटिस का ऑपरेशन दो पद्धतियों- ओपन सर्जरी और लेप्रोस्कोपिक दूरबीन पद्धति- में से किसी के भी जरिए करवाया जा सकता है। आजकल लेप्रोस्कोपिक विधि सर्वाधिक चलन में है, जिसमें छोटे-छोटे चीरों द्वारा ऑपरेशन किया जाता है।

लेप्रोस्कोपिक पद्धति से ऑपरेशन करने पर दर्द कम होता है, दवाओं का उपयोग कम होता है, अस्पताल से जल्दी छुट्टी हो जाती है और हम जल्द ही अपने कार्य व सामान्य जीवनशैली में लौट सकते हैं। हालांकि किस पद्धति से ऑपरेशन होना है, इसका बेहतर निर्धारण सर्जन ही कर सकता है। वह मरीज की शारीरिक स्थिति या उसकी उम्र के मद्देनज़र ऑपरेशन पद्धति की सलाह देता है।  
 



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