• स्किन और हेयर प्राॅब्लम दूर करने वाले फ्लॉवर मिक्स ‘इंडियन कहवा’ कैसे ईजाद हुआ, रेखा साबू ने भास्कर को बताया

Dainik Bhaskar

Jul 16, 2019, 06:54 PM IST

लाइफस्टाइल डेस्क. बारिश के मौसम में अधिकांश लोग गर्मागर्म चाय की तलब रखते हैं। कई लोग कैफीन से बचने के लिए ग्रीन टी और लेमन टी लेते हैं लेकिन जोधपुर की रेखा साबू ऐसे मौसम में फ्लॉवर्स टी लेना पसंद करती हैं। उनके मुताबिक, फूलों के तिजान यानि कहवा में कई प्रकार के फ्लेवर्स हैं। रेखा ने फ्लॉवर्स की महक को जानने के बाद उनके फायदों को तलाशने की कोशिश की तो इन फ्लॉवर्स की पंखुड़ियों में छुपे टॉनिक के राज को जाना। 

फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने किया टेस्ट


  1. कई फूलों को मिलाकर तैयार हुआ कहवा

    रेखा के मुताबिक, वह बेंगलुरू, ऊटी, थाईलैंड और टर्की के बागानों में विजिट कर करीब 35 तरह के फ्लॉवर्स को परखा और 12 तरह के फूलों को चुना। इन फूलों के एक्सट्रैक्ट को कहवा में बदलने के लिए कई एक्सपेरीमेंट किए। कई कॉम्बिनेशन के मिक्स और मैच करने के बाद यह इंडियन कहवा तैयार किया जो न्यूट्रिएंट कंटेंट से भरपूर है। 


  2. फूलों का काढ़ा बना दवा

    साबू ने बताया, मैं मेडिसिन लेने से बचती रहीं। जब भी कोई बीमार होता तो वे गार्डन में जाकर पत्तों और फूलों से काढ़ा बनाकर दे देती। बच्चे भी बीमार हुए तो इस तरह काढ़ा ही पिलाया। फिर इंटरनेट और बोटेनिकल एंगल से इन फूलों के बेनीफिट को जाना। उन्होंने बताया कि इस तरह मैंने आयुर्वेद की स्टडी शुरू कर दी और छोटी-मोटी बीमारियों के लिए घर पर ही फूलों का तिजान बनाना शुरू कर दिया। 


     


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  3. फीवर उतरा तो फूलों को करीब से जाना

    एक बार लैमन ग्रास और जिंजर तिजान से बच्चों का फीवर उतरते देखा तो मेरा इंट्रेस्ट बढ़ने लगा और मैंने अपना गार्डन बनाया। जहां कई प्रकार के फूलों को ग्रो किया। अपनी रूचि को बढ़ाने के लिए साबू ने थाईलैंड, टर्की सहित देश के विभिन्न शहरों के बागानों की विजिट की और वहां से भी फ्लॉवर्स कलेक्ट किए। उनकी पंखुड़ियों को कलेक्ट कर उसमें हर्बल्स, स्पाइसेज और फ्लॉवर्स सहित 32 प्रकार के इंग्रीडिएंट्स मिलाए और ये कैफीन फ्री फ्यूजन केहवा बनाया। इसमें 12 प्रकार के फ्लॉवर्स का फ्लेवर है। उन्होंने बताया कि बहुत से फ्लॉवर्स तो मैंने अपने गार्डन में लगाए और कुछ आज भी टर्की और थाइलैंड से मंगाने पड़ते हैं। 


  4. हर बीमारी के लिए अलग फूल और मसाले

    रेखा साबू ने बताया कि मैंने जब ये तिजान बनाया तो इसके बेनीफिट को फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की ओर से टेस्ट कराया। लेबोरेट्री टेस्ट के साथ स्टरलाइज भी कराया। इस कहवा में अनिद्रा, माइग्रेन, फीवर, टमी फेट बर्न, हैडेक, इम्यून सिस्टम सहित कई बीमारियों के उपचार हैं। इसमें कैमोमाइल और जैस्मीन से नींद ना आने की समस्या का समाधान होता है तो लैमन ग्रास और जिंजर तिजान से फीवर दूर किया जा सकता है। विटामिन ए से भरपूर ब्लू फ्लॉवर से स्किन, हेयर और आंखों से जुड़ी समस्या में राहत मिलती है। गुलाब से महिलाओं की मासिक धर्म में होने वाले दर्द से आराम मिलता है। विटामिन सी से भरपूर हिबिस्कस से इम्यून सिस्टम बेहतर होता है। मिंट और पीयर मिंट से शरीर की चर्बी और माइग्रेन जैसी बीमारियों में आराम मिलता है। इसमें सेफ्रोन, दालचीनी, लौंग, जावित्री, लिकोराज और आटीचोक के अलावा भी कई मसाले मिक्स हैं। 



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