Thursday, October 1, 2020
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Human miniature lab-grown Livers Into Mice by University of Pittsburgh scientists | इंसानी कोशिका से विकसित हुआ लिवर चूहे में ट्रांसप्लांट किया गया, वैज्ञानिक बोले- भविष्य में जिसे ऑर्गन चाहिए उसी के डीएनए से बनेंगे लिवर


  • लिवर तैयार करने वाली अमेरिका की पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का कहना है मिनी लिवर सामान्य लिवर की तरह काम करता है
  • शोधकर्ताओं का दावा, आने वाले समय में यह प्रक्रिया अंगदान करने वालों के लिए विकल्प साबित होगी

दैनिक भास्कर

Jun 06, 2020, 03:58 PM IST

वैज्ञानिकों ने पहली बार इंसान की कोशिका से लैब में लिवर विकसित करके उसे सफलतापूर्वक चूहे में ट्रांसप्लांट किया है। लिवर तैयार करने वाली पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का कहना है कि यह प्रक्रिया भविष्य में ऑर्गन ट्रांसप्लांट की राह आसान करेगी। शोधकर्ताओं का कहना है, यह मिनी लिवर दूसरे सामान्य लिवर की तरह काम करता है। यह भी बाइल एसिड और यूरिया रिलीज करता है।  

ऐसे लैब में तैयार हुआ ‘मिनी लिवर’
शोधकर्ताओं का कहना है कि मिनी लिवर को इंसान के डीएनए से विकसित किया गया है। इस तरह लैब में तैयार होने वाले इंसानी अंग उन डोनर का विकल्प बनेंगे जो अंगदान करते हैं। जरूरतमंद मरीजों में समय से अंग ट्रांसप्लांट किए जा सकेंगे। 

लिवर रिजेक्शन का खतरा घटेगा
शोधकर्ताओं का कहना है यह प्रयोग सफल रहा है। आने वाले समय में जिस मरीज को अंग की जरूरत है उसी के डीएनए से नया लिवर विकसित किया जा सकेगा। ट्रांसप्लांट के बाद मरीज में अंग फेल होने का खतरा भी न के बराबर रहेगा। शरीर नए अंग को अपना सकेगा और रिस्क घटेगा। 

5 चूहों में हुआ ट्रांसप्लांट
शोधकर्ताओं के मुताबिक, लैब में तैयार हुए लिवर 5 चूहों में लगाए गए हैं। डर था कि इनका शरीर लिवर को अपनाने से रिजेक्ट न कर दे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ट्रांसप्लांट के 5 दिन बाद जब जांच की गई तो पाया गया कि मिनी लिवर चूहे में बेहतर काम कर रहा है। 

पहले लिवर तैयार करने में दो साल लगता था, अब एक महीना
शोधकर्ता एलेजेंड्रो सोटो-गुट्रिएज के मुताबिक, जानवर के अंदर मिनी लिवर को देखना काफी अलग था। यह बिल्कुल सामान्य लिवर जैसा था। अब रिसर्च टीम ऐसे लिवर की ग्रोथ की दर बढ़ाने में भी समर्थ है। पहले इसे तैयार करने में दो साल लग जाते हैं अब अब एक माह में ऐसा किया जा सकता है। 



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