नई दिल्ली. INX मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग केस (INX Media Money Laundering Case) में जेल में बंद पूर्व केन्द्रीय मंत्री पी चिदंबरम (P Chidambaram) ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi Highcourt) से उन्हें जमानत दिये जाने का अनुरोध करते हुए कहा कि सबूत दस्तावेजी हैं तथा जांच एजेंसियों के पास हैं, वह इसमें छेड़छाड़ नहीं कर करते है.

कांग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता के वकील ने न्यायमूर्ति सुरेश कैत को बताया कि अभियोजन पक्ष की शिकायत (आरोप पत्र) को प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने अदालत में दायर नहीं किया है और चिदंबरम कैसे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं, जब वह उन्हें नहीं जानते है. चिदंबरम आईएनएक्स मीडिया धनशोधन मामले में तिहाड़ जेल में बंद है.

गवाहों को प्रभावित करने का नहीं था मामला
पूर्व केन्द्रीय वित्त मंत्री चिदंबरम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने कहा कि शुरूआत से ही जांच एजेंसी का यह मामला कभी नहीं था कि कांग्रेस नेता ने गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की, लेकिन अक्टूबर में अचानक, जब उन्हें हिरासत में लिया गया तो यह आरोप लगाया गया कि उन्होंने प्रमुख गवाहों पर दबाव डालने और प्रभावित करने का प्रयास किया था.अदालत 74 वर्षीय चिदंबरम की जमानत याचिका पर उनके वकील की दलीलों पर सुनवाई कर रही थी. अदालत ने ईडी की दलीलों पर सुनवाई के लिए आठ नवम्बर की तारीख तय की.

वकीलों अमित महाजन और रजत नायर के जरिये दाखिल किये अपने लिखित जवाब में ईडी ने जमानत याचिका का यह कहते हुए विरोध किया था कि चिदंबरम द्वारा कथित तौर पर किये गये अपराध की गंभीरता उन्हें राहत पाने का हकदार नहीं बनाती है.

सिब्बल ने जांच एजेंसियों पर उठाए सवाल

सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र किया कि जांच एजेंसियां यह कैसे कह सकती हैं कि एक व्यक्ति जांच में हस्तक्षेप कर रहा है और उन्हें सूबत देना होगा. उन्होंने कहा, ‘‘मैं (चिदंबरम) यह भी नहीं जानता कि मामले में गवाह कौन हैं, मैं हिरासत में कैसे फैसला करूंगा कि मुझे किसे प्रभावित करना है.’’

सिब्बल ने दलील दी, ‘‘वे (ईडी अधिकारी) जांच के दौरान मुझ (चिदंबरम) से यह सवाल (गवाहों को प्रभावित करने का) नहीं कर सकते हैं. उन्हें मेरा सामना करना चाहिए लेकिन उन्होंने यह नहीं किया.’’

डी के शिवकुमार का भी किया जिक्र
कर्नाटक कांग्रेस के नेता डी के शिवकुमार को धनशोधन मामले में जमानत दिये जाने संबंधी उच्च न्यायालय के आदेश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि चिदंबरम के मामले की तरह अभियोजन पक्ष की शिकायत शिवकुमार मामले में भी वहां नहीं थी.

वकील अर्शदीप सिंह के जरिये दाखिल की गई अपनी जमानत याचिका में चिदंबरम ने ईडी के उस दावे का खंडन किया था कि उन्होंने वित्त मंत्री के पद का अपने व्यक्तिगत लाभों के लिए इस्तेमाल किया था. उन्होंने कहा था कि अब तक अदालत के समक्ष रखे गये किसी भी साक्ष्य से इस कथित अपराध में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उनकी संलिप्तता नहीं दिखती है. उन्होंने कहा कि ईडी के जमानत का विरोध करने का उद्देश्य न्याय के लिए आगे बढ़ना नहीं है, बल्कि उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाना है, जिसे 21 अगस्त से 75 दिनों की हिरासत के बाद पहले ही गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया जा चुका है.

16 अक्टूबर को गिरफ्तार किए गए थे चिदंबरम
सुप्रीम कोर्ट ने आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में 22 अक्टूबर को चिदंबरम को जमानत दे दी थी. ईडी ने चिदंबरम को धनशोधन मामले में 16 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था. सीबीआई ने आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में उन्हें 21 अगस्त को गिरफ्तार किया था.

यह मामला 2007 में वित्त मंत्री के रूप में चिदंबरम के कार्यकाल में विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड (एफआईपीबी) द्वारा आईएनएक्स मीडिया को 305 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश प्राप्त करने की मंजूरी में हुयी कथित अनियमितताओं से संबंधित है. इसके बाद ईडी ने 2017 में धनशोधन मामला दर्ज किया था.

ये भी पढ़ें-
विज्ञान फेस्ट में किसी को न भेजने पर सुप्रियो ने बंगाल सरकार पर निकाला गुस्सा





Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here