Friday, October 30, 2020
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IPO में पैसा लगाने वाले निवेशक हुए मालामाल- कुछ ही दिनों में डबल हुई रकम, मिला 115% का मुनाफा

मुंबई. गुरुवार को Chemcon Speciality केमिकल्स की घरेलू बाजार में धमाकेदार लिस्टिंग हुई है. कंपनी के शेयर एनएसई पर 115 फीसदी के बंपर प्रीमियम के साथ 731 रुपये के भाव पर लिस्ट हुए, जबकि इसका इश्यू प्राइस 340 रुपये का था. बीएसई पर भी कंपनी के शेयर 114.99 फीसदी के प्रीमियम के साथ 730.95 रुपये के प्रीमियम पर लिस्ट हुए. केमिकल बनाने वाली कंपनी केमकॉन स्पेशियलिटी केमिकल्स लिमिटेड का 318 करोड़ रुपये का आईपीओ 21 सितंबर को सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था और 23 सितंबर को बंद हुआ था. इसका प्राइस बैंड प्रति इक्विटी शेयर 338–340 रुपये रखा गया था.

Chemcon Speciality कंपनी के कारोबार के बारे में जानिए…ये कंपनी स्पेशलाइज्ड केमिकल प्रोडक्ट बनाने के कारोबार में है. ये कंपनी दुनिया में CMIC केमिकल बनाने वाली दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है. कंपनी की 65 फीसदी कमाई फार्मा इंडस्ट्री से होती है. ये फार्मा इंडस्ट्री के लिए HMDS, CMIC स्पेशियलिटी केमिकल के साथ ऑयल वेल कम्लीशन केमिकल्स (inorganic bromides) बनाती है.ये भारत में HMDS बनाने वाली अकेली कंपनी है. वहीं ये दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी HMDS उत्पादक कंपनी है। इसके अलावा ये भारत की सबसे बड़ी CMIC उत्पादक कंपनी है.

अगर आप भी आईपीओ के जरिए कमाई करना चाहते है तो जानिए इससे जुड़ी सभी काम की बातें….

क्या होता है आईपीओ- कोई कंपनी शेयर बाजार के जरिए पैसा जुटाना चाहती है तो उसे आईपीओ लाना होता है. आईपीओ के जरिए कंपनी के मालिक अपनी हिस्सेदारी बेचता है.आईपीओ का मतलब कोई भी कंपनी जब पहली बार स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होती है तो उसे कुछ शेयर जारी करने होते हैं. इसे हम इनीशियल पब्लिक ऑफर कहते हैं.लॉट साइज मतलब आप कम से कम एक लॉट खरीद सकते हैं या अधिकतम 2 लाख रुपए के कम मूल्य के शेयर में जितना लॉट होगा उतना खरीद सकते हैं. सेबी के नियमों के मुताबिक रिटेल निवेशक किसी एक आईपीओ में 2 लाख रुपए तक का निवेश कर सकता है.ज्यादातर कंपनियां पूंजी जुटाने के लिए आईपीओ लाती हैं. चाहे सरकारी हिस्सेदारी बेच रही हो या फिर बैंक या कंपनी आईपीओ ला रही हो, सबके पीछे पैसे इकट्ठा करने का मकसद होता है.

आईपीओ की समीक्षा करते वक्त जरूरी है कि जाना जाए कि कंपनी क्यों पूंजी जुटाना चाहती है. कंपनी बाजार की मजबूती को भुनाने के लिए ही इश्यू ला सकती है.

ऐसे आईपीओ से दूर रहना ही निवेशकों के लिए बेहतर होगा. लेकिन, अगर कंपनी विस्तार योजनाओं के लिए या नई इकाइयां शुरू करने के लिए पैसा इकट्ठा कर रही हो, तो निवेशक कंपनी के इश्यू में पैसा लगा सकते हैं.

कैसे तय करें की आईपीओ में पैसा लगाएं कि नहीं?- आईपीओ में निवेश करने से पहले कंपनी और सेक्टर के पिछले कुछ सालों के प्रदर्शन की जांच-परख करना जरूरी है. कंपनी द्वारा जारी किए आंकड़ों से ही फैसला न लें. देखें कि दूसरी कंपनियों के मुकाबले कंपनी का प्रदर्शन कैसा रहा है.

क्या होता है प्राइस बैंड-अगर किसी आईपीओ के लिए प्राइस बैंड 90-100 रुपये रखा गया है. निवेश 90 रुपये की बोली लगाता है, मगर कीमत 98 निकलती है, तो उसे एक भी शेयर नहीं मिलेगा. इसका अर्थ है कि निवेशक की बोली निरस्त कर दी जाती है.

अगर लगता है कि इस आईपीओ को हाथोंहाथ लिया जाएगा और वैल्यूएशन भी वाजिब नजर आता है, तो प्राइस बैंक की ऊपरी सीमा पर आईपीओ के लिए बोली लगाई जा सकती है. यदि आईपीओ के लिए 100-110 रुपये का प्राइस बैंड है, तो आईपीओ के लिए 110 रुपये की बोली लगाई जा सकती है.

कंपनी के किन आंकड़ों पर ध्यान देना चाहिए?- डेट-इक्विटी रेश्यो से पता चल सकता है कि कंपनी पर कुल कितना कर्ज है. साथ ही, ऑपरेटिंग मार्जिन से कंपनी के मुनाफे के बारे में जाना जा सकता है. इसके अलावा कंपनी के मैनेजमेंट को भी जानना जरूरी है.सेबी के निर्देश के मुताबिक आईपीओ लाने वाली सभी कंपनियों पिछले सालों के आंकड़ें, प्रोमोटरों की जानकारी मुहैया कराना जरूरी है. रिटेल निवेशकों इश्यू के प्रॉस्पेक्ट्स से सारी जानकारी मिल सकती है.

आईपीओ में पैसा कैसे लगाएं- इसके लिए आपको डीमैट अकाउंट खुलवाना होगा. वो आप अपने बैंक या फिर किसी ब्रोकर्स के पास खुलवा सकते है. आईपीआई खुलने के बाद उसमें अप्लाई किया जाता है. इसके बाद शेयर अलॉट होते है. ऐसा जरूरी नहीं कि आपको शेयर मिल ही जाएं. क्योंकि ज्यादा लोंगे के अप्लाई करने पर इसे लॉटरी बेसिस पर तय किया जाता है.

इसके बाद आईपीओ की लिस्टिंग की तारीख आती है और लिस्टिंग वाले दिन अगर शेयर अपने इश्यू प्राइस यानी जिस दाम पर आपको शेयर मिले है. उससे ऊपर लिस्ट होता है तो आपको मुनाफा होता है. अगर इश्यू प्राइस से दाम नीचे चला जाता है तो आपको शेयर बेचने पर नुकसान होता है.

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