Tuesday, October 20, 2020
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Mauna Panchami 2020 Know Puja Vidhi And Relegious Sinificance – Sawan 2020: मौना पंचमी आज, ऐसे करें शिव आराधना, मन की मुराद होगी पूरी


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मौना पंचमी शुक्रवार 10 जुलाई को है। श्रावण माह कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मौना पंचमी (Maun Panchami 2020) के नाम से जाना जाता है यानी यह सावन का पांचवां दिन होता है। मौना पंचमी के दिन शेषनाग की पूजा का विधान होता है। इस दिन भगवान भोलेनाथ की आराधना करके मौन व्रत रखा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि नाग देव का संबंध भगवान शिव से भी है। उनके गले में वे लिपटे रहते हैं।
मौना पंचमी व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मौना पंचमी के दिन शिव के दक्षिणामूर्ति स्वरूप की पूजा महत्व होता है। इस रूप में शिव को ज्ञान, ध्यान, योग और विद्या का जगद्गुरु माना जाता है। इस दिन दक्षिणामूर्ति स्वरूप शिव की पूजा से बुद्धि तथा ज्ञान में बढ़ोतरी होती है तथा मनुष्य हर तरफ से जीवन में सफलता पाता है। इस दिन पंचामृत और जल से शिवजी का अभिषेक किया जाता है। मौना पंचमी के दिन  शेषनाग को सूखे फल, खीर आदि अर्पित किए जाते हैं।
मौना पंचमी पर इस विधि से करें भगवान शिव की आराधना
शुद्ध होकर घर के मंदिर में स्थापित शिवलिंग का जलाभिषेक करें। 
शिवजी का पंचामृत से रुद्राभिषेक करें, बिल्व पत्र अर्पित करें।
शिवलिंग पर धतूरा, भांग, आलू, चंदन, चावल चढ़ाएं और सभी को तिलक लगाएं।
प्रसाद के रूप में भगवान शिव को घी शक्कर का भोग लगाएं।
धूप, दीप से गणेश जी की आरती करें। 
अंत में भगवान शिव की आरती करें और प्रसाद का वितरण करें।
संभव हो तो इसे भी करें
संध्याकाल में शिव गायत्री की ग्यारह-ग्यारह माला जपें।
शिव आराधना के समय 108 बार ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करें।
संभव हो तो तीन बार रुद्राष्टक पढ़ लें। 
शिव पूजा में इन बातों का रखें विशेष ध्यान
शिवजी की पूजा में केतकी के फूलों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कहा जाता है कि केतकी के फूल चढ़ाने से भगवान शिवजी नाराज होते हैं। इसके अलावा, तुलसी को कभी भी भगवान शिवजी को अर्पित नहीं किया जाता है। साथ ही शिवलिंग पर कभी भी नारियल का पानी नहीं चढ़ाना चाहिए। भगवान शिवजी को हमेशा कांस्य और पीतल के बर्तन से जल चढ़ाना चाहिए।

मौना पंचमी शुक्रवार 10 जुलाई को है। श्रावण माह कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मौना पंचमी (Maun Panchami 2020) के नाम से जाना जाता है यानी यह सावन का पांचवां दिन होता है। मौना पंचमी के दिन शेषनाग की पूजा का विधान होता है। इस दिन भगवान भोलेनाथ की आराधना करके मौन व्रत रखा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि नाग देव का संबंध भगवान शिव से भी है। उनके गले में वे लिपटे रहते हैं।

मौना पंचमी व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मौना पंचमी के दिन शिव के दक्षिणामूर्ति स्वरूप की पूजा महत्व होता है। इस रूप में शिव को ज्ञान, ध्यान, योग और विद्या का जगद्गुरु माना जाता है। इस दिन दक्षिणामूर्ति स्वरूप शिव की पूजा से बुद्धि तथा ज्ञान में बढ़ोतरी होती है तथा मनुष्य हर तरफ से जीवन में सफलता पाता है। इस दिन पंचामृत और जल से शिवजी का अभिषेक किया जाता है। मौना पंचमी के दिन  शेषनाग को सूखे फल, खीर आदि अर्पित किए जाते हैं।

मौना पंचमी पर इस विधि से करें भगवान शिव की आराधना
शुद्ध होकर घर के मंदिर में स्थापित शिवलिंग का जलाभिषेक करें। 
शिवजी का पंचामृत से रुद्राभिषेक करें, बिल्व पत्र अर्पित करें।
शिवलिंग पर धतूरा, भांग, आलू, चंदन, चावल चढ़ाएं और सभी को तिलक लगाएं।
प्रसाद के रूप में भगवान शिव को घी शक्कर का भोग लगाएं।
धूप, दीप से गणेश जी की आरती करें। 
अंत में भगवान शिव की आरती करें और प्रसाद का वितरण करें।
संभव हो तो इसे भी करें
संध्याकाल में शिव गायत्री की ग्यारह-ग्यारह माला जपें।
शिव आराधना के समय 108 बार ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करें।
संभव हो तो तीन बार रुद्राष्टक पढ़ लें। 

शिव पूजा में इन बातों का रखें विशेष ध्यान
शिवजी की पूजा में केतकी के फूलों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कहा जाता है कि केतकी के फूल चढ़ाने से भगवान शिवजी नाराज होते हैं। इसके अलावा, तुलसी को कभी भी भगवान शिवजी को अर्पित नहीं किया जाता है। साथ ही शिवलिंग पर कभी भी नारियल का पानी नहीं चढ़ाना चाहिए। भगवान शिवजी को हमेशा कांस्य और पीतल के बर्तन से जल चढ़ाना चाहिए।



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