• चूहे में खोजी गई नई एंटीबॉडी उस ACE2 एंजाइम को जकड़ती है जिसकी मदद नया कोरोनावायरस इंसानों में पहुंचता है
  • वैज्ञानिकों ने एंटीबॉडी का असर नए कोरोनावायरस के साथ सार्स और मर्स संक्रमण पर भी देखा, प्रयोग सफल रहा

दैनिक भास्कर

May 07, 2020, 11:26 PM IST

कोपेनहैगन. नीदरलैंड्स के वैज्ञानिकों ने ऐसी एंटीबॉडी की खोज की है जो कोरोनावायरस का संक्रमण रोकती है। इसका नाम 47D11 है। यह एंटीबॉडी कोरोनावायरस के स्पाइक प्रोटीन को जकड़कर ब्लॉक कर देती है। कोरोना शरीर में संक्रमण फैलाने के लिए इसी स्पाइक प्रोटीन से कोशिकाओं को जकड़ता है। कोशिकाओं को संक्रमित करने के बाद वायरस इसमें अपनी संख्या को बढ़ाना शुरू करता है और धीरे-धीरे हालत नाजुक होती जाती है। एंटीबॉडी की खोज करने वाली नीदरलैंड्स यूट्रेच्ड यूनिवर्सिटी ने चूहों पर किए प्रयोग में 47D11 एंटीबॉडी की खोज की है।

इलाज में असरदार साबित होगी
शोध के दौरान पाया गया कि चूहों की कोशिकाओं में 47D11 एंटीबॉडी मौजूद होने पर यह कोरोना के प्रोटीन को पकड़कर ब्लॉक करती है और उसके असर को खत्म करते हुए संक्रमण रोकती है। शोधकर्ताओं का कहना है, यह नई खोज कोरोना मरीजों के इलाज में विशेष रूप से मददगार साबित होगी। 

चूहे में 51 एंटीबॉडीज में से इसे निकाला गया
शोधकर्ताओं ने लैब में अलग-अलग कोरोनावायरस के स्पाइक प्रोटीन को चूहे की कोशिकाओं में इंजेक्ट किया। प्रयोग में लाए गए कोरोनावायरस में SARS-CoV2, सार्स और मर्स के वायरस भी शामिल थे। शोधकर्ताओं ने कोरोना को हराने वाली चूहे की 51 एंटीबॉडीज अलग की। इनमें से सिर्फ 47D11 नाम की एंटीबॉडी ऐसी थी जो संक्रमण को रोकने में सफल थी।

कोरोना के खतरनाक प्रोटीन को बेअसर करती है
शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर यह एंटीबॉडी इंसानों में पहुंचाई जाए तो यह संक्रमण के तरीके को बदलेगी। यह संक्रमित इंसान से स्वस्थ इंसान में वायरस फैलने से रोकेगी। उनका दावा है कि यह नए कोरोनावायरस के संक्रमण को बेअसर करेगी।

दोनों कोरोनावायरस पर असरदार साबित होगी
शोधकर्ता प्रोफेसर बर्नंड-जेन बॉश का दावा है कि यह एंटीबॉडी दोनों कोरोनावायरस (SARS-CoV और SARS-CoV2) का संक्रमण रोकेगी। इसके अलावा कोरोना के कारण भविष्य में सामने आने वाले मामलों में कमी लाई जा सकेगी। यह एंटीबॉडी ACE2 एंजाइम को जकड़ती जिसकी मदद नया कोरोनावायरस इंसानों में पहुंचता है।

क्या होती है एंटीबॉडी
ये प्रोटीन से बनीं खास तरह की इम्यून कोशिकाएं होती हैं जिसे बी-लिम्फोसाइट कहते हैं। जब भी शरीर में कोई बाहरी चीज (फॉरेन बॉडीज) पहुंचती है तो ये अलर्ट हो जाती हैं। बैक्टीरिया या वायरस के विषैले पदार्थों को निष्क्रिय करने का काम यही एंटीबॉडीज करती हैं। इस तरह ये शरीर को प्रतिरक्षा देकर हर तरह के रोगाणुओं के असर को बेअसर करती हैं। 



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