Tuesday, September 29, 2020
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People with blood type A more likely to suffer severe coronavirus symptoms, research finds | A ब्लड ग्रुप वालों में कोरोना संक्रमण का खतरा ज्यादा, इन्हें 50% ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत पड़ सकती है


  • जर्मनी की कील यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने रिसर्च में किया दावा, कहा- इसका संबंध डीएनए के एक खास हिस्से से
  • इटली और स्पेन के 1610 कोरोना के मरीजों पर हुई स्टडी, जीनोम सिक्वेंसिंग के एनालिसिसषण के बाद जारी किए नतीजे

दैनिक भास्कर

Jun 07, 2020, 12:38 AM IST

A- ब्लड ग्रुप वालों को कोरोना के संक्रमण का खतरा अधिक है। इनमें संक्रमण का स्तर गंभीर हो सकता है। यह दावा जर्मनी की कील यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है। उनका कहना है कि दूसरों के मुकाबले इनके संक्रमित होने का खतरा 6 फीसदी तक ज्यादा है।

शोधकर्ताओं ने पाया है कि A- ब्लड ग्रुप वाले कोरोना पीड़ितों में डीएनए का एक खास हिस्सा ऐसा है जो इसके लिए जिम्मेदार हो सकता है। रिसर्च के दौरान इसकी पुष्टि हुई है। इससे पहले चीन में हुई रिसर्च में भी A- ब्लड ग्रुप वालों में कोरोना के संक्रमण का खतरा अधिक बताया गया था। 

वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है
शोधकर्ताओं का कहना है कि A- ग्रुप वालों में 50 फीसदी तक ये आशंका है कि उन्हें ऑक्सीजन की अधिक जरूरत पड़ सकती है, या उन्हें वेंटिलेटर पर ले जाना पड़ सकता है। यही वजह है कि युवा और स्वस्थ लोग भी कोरोना से संक्रमित हो सकते हैं या इनकी मौत भी हो सकती है। अमेरिका में कोरोना के 40 फीसदी मरीज युवा है। 

पिछले हफ्ते 30 फीसदी युवा संक्रमित हुए
अमेरिका की सबसे बड़ी स्वास्थ्य एजेंसी सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक, पिछले हफ्ते अस्पतालों में भर्ती होने वाले कोरोना के 30 फीसदी मरीजों की उम्र 18 से 49 साल के बीच थी। ब्लड ग्रुप-ए वालों में किस उम्र वर्ग के लोग सबसे ज्यादा संक्रमण के रिस्क जोन में हैं, शोधकर्ता इसका पता लगा रहे हैं।

डीएनए रिपोर्ट में कॉमन पैटर्न दिखा
शोधकर्ताओं ने इटली और स्पेन के ऐसे कोरोना पीड़ितों के डीएनए सैम्पल लिए जो सांस नहीं ले पा रहे थे। दोनों देशों के ऐसे 1,610 मरीजों का जीनोम सिक्वेंस जांचा गया। शोधकर्ताओं का कहना है कि इनकी डीएनए रिपोर्ट में एक कॉमन पैटर्न दिखा जो इनमें जान का जोखिम बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हो सकता है। 
इनकी रिपोर्ट का मिलान कोरोना के ऐसे 2,205 मरीजों से किया जो गंभीर बीमार नहीं थे। शोधकर्ताओं ने पाया डीएनए के दो जीन ऐसे है जो 1,610 वाले समूह की मरीजों की हालत नाजुक होने की वजह थे। 

ब्लड ग्रुप-ओ वालों में खतरा कम
शोधकर्ताओं का कहना है कि O- ब्लड ग्रुप वालों में संक्रमण के गंभीर रूप लेने की आशंका सबसे कम है। ब्लड ग्रुप-ए वालों में खतरे की वजह इम्यून सिस्टम हो सकती है। जो अधिक सक्रिय होने पर फेफड़ों में सूजन बढ़ाने के साथ दूसरे अंगों को इस कदर प्रभावित करता है कि ये कोरोना से नहीं लड़ पाते।



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