Tuesday, October 20, 2020
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Sawan 2020 Second Sawan Somwar Shiv Puja Vidhi – Sawan Somwar 2020: 13 जुलाई को सावन का दूसरा सोमवार, ऐसे करें शिव की पूजा



sawan 2020: ॐ नमः शिवायका जप करते हुए शिव आराधना करें

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श्रावण का माह शिव पूजा, रुद्राभिषेक, दरिद्रता निवारक अनुष्ठान, मोक्ष प्राप्ति, आसुरी शक्तियों से निवृत्ति, भक्ति प्राप्ति तथा दैहिक, दैविक और भौतिक, तीनो तापों से मुक्ति दिलाने के लिए श्रेष्ठ माना गया है। इस माह में एक बेल पत्र भी अगर शिव जी को अर्पित किया जाए तो वह अमोघ फलदायी होता है। जिस प्रकार मकर राशि पर सूर्य के पहुंचने पर सभी देवी-देवता, यक्ष आदि पृथ्वी पर आते हैं उसी प्रकार कर्क राशिगत सूर्य में भी सभी देवी देवता पृथ्वी पर आते हैं। ये सभी भगवान शिव की आराधना पृथ्वी पर करके अपना पुण्य बढाते हैं। स्वयं भगवान विष्णु, ब्रह्मा, इंद्र, शिवगण आदि सभी श्रावण में पृथ्वी पर ही वास करते हैं और सभी अलग-अलग रूपों में अनेकों प्रकार से शिव आराधना करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस माह में की गयी शिव पूजा तत्काल शुभ फलदायी होती है। इसके पीछे स्वयं शिव का ही वरदान ही है। समुद्र मंथन के समय जब कालकूट नामक विष निकला तो उसके ताप से सभी देवता भयभीत हो गए। तीनो लोकों में त्राहि-त्राहि मच गयी। किसी के पास भी इसका निदान नहीं था, उस कालकूट विष से वायु मंडल प्रदूषित होने लगा, जिससे जनजीवन पर घोर संकट आ गया। तभी सभी देवता भगवान शिव की शरण में गए और इस विष से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की। लोक कल्याण के लिए भोलेनाथ ने इस विष का पान कर लिया और उसे अपने गले में ही रोक लिया जिसके प्रभाव से उनका गला नीला पड़ गया और वे नील कंठ कहलाये।विष के ताप-गर्मी से व्याकुल शिव तीनों लोको में भ्रमण करने लगे किन्तु वायु की गति भी मंद पड़ गयी थी इसलिए उन्हें कहीं भी शांति नहीं मिली। अंत में वे पृथ्वी पर आये और पीपल के वृक्ष के पत्तों को चलता हुआ देख उसके नीचे बैठ गए। जहां कुछ शांति मिली। शिव के साथ ही सभी तैतींस करोड़ देवी-देवता उस पीपल वृक्ष में अपनी शक्ति समाहित कर शिव को सुंदर छाया और जीवन दायिनी वायु प्रदान करने लगे। चन्द्रमा ने अपनी पूर्ण शीतल शक्ति से शिव को शांति पहुंचाई तो शेषनाग ने गले में लिपटकर उस कालकूट विष के दाहकत्व को कम करने में लग गए ।देवराज इन्द्र और गंगा माँ देव निरंतर शिव शीश पर जलवर्षा करने लगे। यह जानकर की विष ही विष के असर को कम कर सकता है सभी शिवगण भांग, धतूर, बेलपत्र आदि शिव को खिलाने लगे जिससे भोलेनाथ को शांति मिली। श्रावण माह की समाप्ति तक भगवान शिव पृथ्वी पर ही रहे।उन्होंने चन्द्रमा पीपल वृक्ष, शेषनाग आदि सभी को वरदान दिया कि इस माह में जो भी जीव मुझे पत्र, पुष्प, भांग, धतूर और बेल पत्र आदि चढ़ाएगा उसे संसार के तीनों कष्टों दैहिक यानी स्वास्थ्य से सम्बंधित, दैविक यानी प्राकृतिक आपदा से सम्बंधित और भौतिक यानी दरिद्रता से सम्बंधित तीनों कष्टों से मुक्ति मिलेगी। साथ ही उसे मेरे लोक की प्राप्ति भी होगी। चंद्रमा और शेषनाग पर विशेष अनुग्रह करते हुए शिव ने कहा कि जो तुम्हारे दिन सोमवार को मेरी आराधना करेगा वह मानसिक कष्टों से मुक्त हो जायेगा उसे किसी प्रकार की दरिद्रता नहीं सताएगी।शेषनाग को शिव ने आशीर्वाद देते हुए कहा की जो इस माह में नागों को दूध पिलाएगा, उसे काल कभी नहीं सताएगा और उसकी वंश वृद्धि में कोई रुकावट नहीं आएगी। उसे सर्प दंश का भय नहीं रहेगा। गंगा माँ को भगवान शिव ने कहा की जो इस माह में गंगा जल मुझे अर्पित करेगा वह जीवन मरण के बंधन से मुक्त हो जायेगा। पीपल वृक्ष को आशीर्वाद देते हुए भोले ने कहा कि तुम्हारी शीतल छाया में बैठकर मुझे असीम शांति मिली इस लिए मेरा अंश तुम्हारे अंदर हमेशा विद्यमान रहेगा जो तुम्हारी पूजा करेगा उसे मेरी पूजा का फल प्राप्त होगा। शिव के इस वचन को सुनकर सभी देवों ने उन्हें भांग धतूर ,बेलपत्र और गंगा जल अर्पित किया। इसीलिए जो इस माह में शिव पर गंगाजल चढाते हैं, वे देव तुल्य होकर  जीवन मरण के बंधन से मुक्त हो जाते हैं । मानशिक परेशानी, कुंडली में अशुभ चन्द्र का दोष, मकान-वाहन का सुख और संतान से संबधित चिंता शिव आराधना से दूर हो जाती है। इस माह में सर्पों को दूध पिलाने कालसर्प-दोष से मुक्ति मिलती है और उसके वंश का विस्तार होता है। ॐ नमः शिवाय करालं महाकाल कालं कृपालं ॐ नमः शिवायका जप करते हुए शिव आराधना करें।

श्रावण का माह शिव पूजा, रुद्राभिषेक, दरिद्रता निवारक अनुष्ठान, मोक्ष प्राप्ति, आसुरी शक्तियों से निवृत्ति, भक्ति प्राप्ति तथा दैहिक, दैविक और भौतिक, तीनो तापों से मुक्ति दिलाने के लिए श्रेष्ठ माना गया है। इस माह में एक बेल पत्र भी अगर शिव जी को अर्पित किया जाए तो वह अमोघ फलदायी होता है। जिस प्रकार मकर राशि पर सूर्य के पहुंचने पर सभी देवी-देवता, यक्ष आदि पृथ्वी पर आते हैं उसी प्रकार कर्क राशिगत सूर्य में भी सभी देवी देवता पृथ्वी पर आते हैं। ये सभी भगवान शिव की आराधना पृथ्वी पर करके अपना पुण्य बढाते हैं। स्वयं भगवान विष्णु, ब्रह्मा, इंद्र, शिवगण आदि सभी श्रावण में पृथ्वी पर ही वास करते हैं और सभी अलग-अलग रूपों में अनेकों प्रकार से शिव आराधना करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस माह में की गयी शिव पूजा तत्काल शुभ फलदायी होती है। इसके पीछे स्वयं शिव का ही वरदान ही है। समुद्र मंथन के समय जब कालकूट नामक विष निकला तो उसके ताप से सभी देवता भयभीत हो गए। तीनो लोकों में त्राहि-त्राहि मच गयी। किसी के पास भी इसका निदान नहीं था, उस कालकूट विष से वायु मंडल प्रदूषित होने लगा, जिससे जनजीवन पर घोर संकट आ गया। तभी सभी देवता भगवान शिव की शरण में गए और इस विष से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की। लोक कल्याण के लिए भोलेनाथ ने इस विष का पान कर लिया और उसे अपने गले में ही रोक लिया जिसके प्रभाव से उनका गला नीला पड़ गया और वे नील कंठ कहलाये।

विष के ताप-गर्मी से व्याकुल शिव तीनों लोको में भ्रमण करने लगे किन्तु वायु की गति भी मंद पड़ गयी थी इसलिए उन्हें कहीं भी शांति नहीं मिली। अंत में वे पृथ्वी पर आये और पीपल के वृक्ष के पत्तों को चलता हुआ देख उसके नीचे बैठ गए। जहां कुछ शांति मिली। शिव के साथ ही सभी तैतींस करोड़ देवी-देवता उस पीपल वृक्ष में अपनी शक्ति समाहित कर शिव को सुंदर छाया और जीवन दायिनी वायु प्रदान करने लगे। चन्द्रमा ने अपनी पूर्ण शीतल शक्ति से शिव को शांति पहुंचाई तो शेषनाग ने गले में लिपटकर उस कालकूट विष के दाहकत्व को कम करने में लग गए ।देवराज इन्द्र और गंगा माँ देव निरंतर शिव शीश पर जलवर्षा करने लगे। यह जानकर की विष ही विष के असर को कम कर सकता है सभी शिवगण भांग, धतूर, बेलपत्र आदि शिव को खिलाने लगे जिससे भोलेनाथ को शांति मिली। श्रावण माह की समाप्ति तक भगवान शिव पृथ्वी पर ही रहे।

उन्होंने चन्द्रमा पीपल वृक्ष, शेषनाग आदि सभी को वरदान दिया कि इस माह में जो भी जीव मुझे पत्र, पुष्प, भांग, धतूर और बेल पत्र आदि चढ़ाएगा उसे संसार के तीनों कष्टों दैहिक यानी स्वास्थ्य से सम्बंधित, दैविक यानी प्राकृतिक आपदा से सम्बंधित और भौतिक यानी दरिद्रता से सम्बंधित तीनों कष्टों से मुक्ति मिलेगी। साथ ही उसे मेरे लोक की प्राप्ति भी होगी। चंद्रमा और शेषनाग पर विशेष अनुग्रह करते हुए शिव ने कहा कि जो तुम्हारे दिन सोमवार को मेरी आराधना करेगा वह मानसिक कष्टों से मुक्त हो जायेगा उसे किसी प्रकार की दरिद्रता नहीं सताएगी।

शेषनाग को शिव ने आशीर्वाद देते हुए कहा की जो इस माह में नागों को दूध पिलाएगा, उसे काल कभी नहीं सताएगा और उसकी वंश वृद्धि में कोई रुकावट नहीं आएगी। उसे सर्प दंश का भय नहीं रहेगा। गंगा माँ को भगवान शिव ने कहा की जो इस माह में गंगा जल मुझे अर्पित करेगा वह जीवन मरण के बंधन से मुक्त हो जायेगा। पीपल वृक्ष को आशीर्वाद देते हुए भोले ने कहा कि तुम्हारी शीतल छाया में बैठकर मुझे असीम शांति मिली इस लिए मेरा अंश तुम्हारे अंदर हमेशा विद्यमान रहेगा जो तुम्हारी पूजा करेगा उसे मेरी पूजा का फल प्राप्त होगा। शिव के इस वचन को सुनकर सभी देवों ने उन्हें भांग धतूर ,बेलपत्र और गंगा जल अर्पित किया। इसीलिए जो इस माह में शिव पर गंगाजल चढाते हैं, वे देव तुल्य होकर  जीवन मरण के बंधन से मुक्त हो जाते हैं । मानशिक परेशानी, कुंडली में अशुभ चन्द्र का दोष, मकान-वाहन का सुख और संतान से संबधित चिंता शिव आराधना से दूर हो जाती है। इस माह में सर्पों को दूध पिलाने कालसर्प-दोष से मुक्ति मिलती है और उसके वंश का विस्तार होता है। ॐ नमः शिवाय करालं महाकाल कालं कृपालं ॐ नमः शिवायका जप करते हुए शिव आराधना करें।



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