नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (Adjusted Gross Revenue) बकाया भुगतान को लेकर फटकार लगाने के बाद भारती एयरटेल (Bharti Airtel) ने देर शाम को जानकारी दी है कि बकाये का कुछ हिस्सा 20 फरवरी तक जमा कर देगी. एयरटेल द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, कंपनी 20 फरवरी तक 10,000 करोड़ रुपये का भुगतान कर देगी. वहीं, बाकी रकम का भुगतान सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई से पहले कर दिया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने सभी टेलिकॉम कंपनियों को आदेश दिया है कि वो 1.47 लाख करोड़ रुपये का भुगतान 17 मार्च से पहले कर दें. इस मामले पर अगली सुनवाई अब 17 माच्र को होनी है.सुप्रीम कोर्ट द्वारा फटकार के बाद डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकॉम (DoT- Department of Telecom) ने सभी कंपनियों को कहा है कि वो आज आधी रात से पहले बकाये का भुगतान करें. टेलिकॉम कंपनियों (Telecom Companies) पर 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है. इसके पहले 24 अक्टूबर 2019 को सुनवाई के दौरान ही सुप्रीम कोर्ट ने 23 जनवरी तक इन कंपनियों को भुगतान करने का आदेश दिया है.कितना है कंपनियों पर कुल बकाया पिछले साल नवंबर महीने में केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी थी कि टेलिकॉम विभाग के प्रति इन कंपनियों का कुल 1.47 लाख करोड़ रुपये बकाया है. इसमें कंपनियों का लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज शामिल है. लाइसेंस के तौर पर अक्टूबर महीने तक कुल बकाया रकम 92,642 करोड़ रुपये और स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज के तौर पर 55,054 करोड़ रुपये बकाया है. सबसे अधिक बकाया भारती एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया का है.यह भी पढ़ें: मार्च से शुरू होने जा रही रामायण एक्सप्रेस ट्रेन, जानिए इसके बारे में सब कुछएयरटेल और वोडाफोन आइडिया पर सबसे अधिक बकायासरकार द्वारा नवंबर 2019 में दी गई जानकारी के अनुसार, भारती एयरटेल पर कुल 35,585 करोड़ रुपये बकाया है. इसमें 21,682 करोड़ रुपये लाइसेंस फीस और 13,904 करोड़ रुपये स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज के तौर पर बकाया है. इसमें टाटा टेलिसर्विसेज और टेलिकनॉर नहीं शामिल है. जबकि, वोडाफोन आइडिया का 53,038 करोड़ रुपये बकाया है. इसमें 28,309 करोड़ रुपये लाइसेंस फीस और 24,730 करोड़ रुपये स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज के तौर पर बकाया है.भुगतान के लिए 3 महीने का दिया गया था समयसीमा
टेलिकॉम मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में कहा था, ‘सुप्रीम कोर्ट ने ग्रॉस रेवेन्यू और एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू की परिभाषा टेलिकॉम विभाग के अनुसार ही बताया है. कोर्ट ने बकाया भुगतान के लिए 3 महीने का समय दिया है.’ उन्होंने आगे कहा कि 24 अक्टूबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेशानुसार लाइसेंस फीस की रकम प्रोविजनल है और यह रिवाइज हो सकती है. उन्होंने इशारा किया था कुल बकाया रकम 1.47 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकती है.टेलिकॉम मंत्री से जब पूछा गया कि क्या एजीआर पेमेंट को लेकर सरकार इन टेलिकॉम कंपनियों को पेनाल्टी और ब्याज से राहत देगी, तो इसपर उन्होंने बताया कि अभी तक सरकार की तरफ से ऐसा किसी प्रस्ताव पर विचार नहीं किया जा रहा है. सरकार ने भुगतान की समयसीमा में राहत देने की बात से इनकार कर दिया था.यह भी पढ़ें: SBI की ब्रांच बंद करने और छंटनी पर सरकार ने दी ये जानकारीसरकार से राहत की उम्मीद में हैं कंपनियां बता दें कि संकट के दौर से गुजर रही टेलिकॉम कंपनियों लगातार इस कोशिश हैं कि पेनाल्टी और ब्याज के मोर्चे पर उन्हें सरकार से राहत मिल सके. हाल ही में वोडाफोन ने कहा था कि कंपनी की मौजूदा हालत चिंताजनक है और अगर उसे सरकार से राहत की उम्मीद है. 5 फरवरी को वोडाफोन ने कहा था, ‘अक्टूबर महीने में देश के सर्वोच्च न्यायालय ने एडजस्टेड ग्रॉस रिवेन्यू (Adjusted Gross Revenue) को लेकर जो फैसला सुनया, वो टेलिकॉम इंडस्ट्री के अनुकूल नहीं है. कंपनी ने बयान में आगे कहा कि कंपनी तत्परता से भारत सरकार से कई तरह के राहत की उम्मीद कर रही है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि विभिन्न दरें और ब्याज का पेमेंट समय रहते किया जा सके. ऐसा करने से कंपनी को समय रहते अपनी प्रतिबद्धता को पूरी करने में मदद मिल सकेगी.क्या होता है AGR टेलिकॉम कंपनियों को रेवेन्यू का कुछ हिस्सा सरकार को स्पेक्ट्रम फीस जिसे स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज (SUC) और लाइसेंस फीस के रूप में जमा करना होता है. टेलिकॉम कंपनियों का डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्युनिकेशन्स (DoT) से लाइसेंस अग्रीमेंट होता है. अग्रीमेंट में ही एजीआर से जुड़े कंडीशन्स होते हैं.यह भी पढ़ें: बैंक से परेशान एक आदमी ने ट्विटर पर की वित्त मंत्री से शिकायत, तुरंत हुआ एक्शन



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here