• कांग्रेस नेताओं के निशाने पर आए केरल के सांसद शशि थरूर ने प्रधानमंत्री की चुनौती स्वीकारी
  • पीएम बोले- ऐसा कर लोग सालभर में 300 नए शब्द सीख सकते हैं

Dainik Bhaskar

Aug 31, 2019, 01:38 AM IST

नई दिल्ली/काेच्चि. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अच्छे कामों की तारीफ करके कांग्रेस नेताओं के निशाने पर आए सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को फिर माेदी की तारीफ की। थरूर ने इस बार प्रधानमंत्री के हर दिन भारतीय भाषाओं का एक शब्द सीखने के सुझाव की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह उनकी भाषाई चुनौती स्वीकार करते हैं और हर दिन अंग्रेजी, हिंदी और मलयालम में एक शब्द ट्वीट करेंगे। थरूर ने पहला ट्वीट कर कहा- ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने भाषण में मातृभाषा के अलावा दूसरी किसी भाषा के शब्द सीखने का सुझाव दिया है। मैं इस हिंदी के प्रभुत्व से हटने का स्वागत करता हूं और भाषा की इस चुनौती को आगे बढ़ाऊंगा।’

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मलयालम मनोरमा न्यूज काॅन्क्लेव- 2019 का उद्धाटन करते हुए कहा कि ‘मीडिया सबसे आसान शुरुआत यह कर सकता है कि देशभर में बोली जाने वाली 10 से 12 भाषाओं में वह एक शब्द का प्रकाशन करे। ऐसा करने से एक व्यक्ति एक साल में विभिन्न भाषाओं के 300 नए शब्द सीख सकता है। जब कोई व्यक्ति दूसरी भाषा सीख लेता है, तो वह भाषाओं में समानता के बारे में जान सकेगा। इसी आधार पर सही प्रकार से भारतीय संस्कृति की एकरूपता की तारीफ कर सकेगा। इससे उन लोगों के नए समूह बन सकते हैं, जो विभिन्न भाषाओं को सीखने के इच्छुक हैं।’ 

 

थरूर ने दूसरा ट्वीट कर कहा- ‘प्रधानमंत्री की भाषाई चुनौती के जवाब में मैं रोजाना अंग्रेजी, हिंदी और मलयालम में एक शब्द ट्वीट करूंगा। अन्य लोग भी ऐसा कर सकते हैं। इस प्रयास से देश में एकता को बल मिलेगा। आज का पहला शब्द बहुलवाद है।’ उन्होंने बहुलवाद को अंग्रेजी और मलयालम में भी लिखा। अंग्रेजी में इसे ‘प्लुरलिज्म’ और मलयालम में ‘बहुवचनम’ उच्चारित करते हैं।

 

भाषाओं का इस्तेमाल स्वार्थ सिद्ध करने के लिए न हो: पीएम

कॉन्क्लेव में मोदी ने कहा- ‘कल्पना करिए कि हरियाणा में एक समूह मलयालम भाषा सीख रहा है और कर्नाटक में एक समूह बंगाली भाषा सीख रहा है। लेकिन ये बड़ी दूरियां केवल एक कदम बढ़ाकर ही तय की जा सकती हैं। क्या हम वह पहला कदम उठा सकते हैं? अब तक भाषाओं का इस्तेमाल अपने निहित स्वार्थाें को सिद्ध करने में किया गया है ताकि देश को बांटने में कृत्रिम दीवारें खड़ी की जा सकें।’



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