Nirbhaya Case: दोषी विनय और मुकेश की क्यूरेटिव पिटीशन पर SC में आज सुनवाई, 22 को होनी हो फांसी

निर्भया के चारों दोषियों को 22 जनवरी को होनी है फांसी.

निर्भया (Nirbhaya Gang Rape Case) के दोषी विनय शर्मा के वकील एपी सिंह और मुकेश सिंह के वकील वृंदा ग्रोवर ने क्यूरेटिव पिटीशन (Curative Plea) दायर की है. पिटीशन में दोनों दोषियों की फांसी की सज़ा को उम्रकैद में बदलने की मांग की गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated:
    January 14, 2020, 7:54 AM IST

नई दिल्ली. दिल्ली के निर्भया केस (Nirbhaya Gang Rape Case) में पटियाला हाउस कोर्ट से डेथ वॉरंट जारी होने के बाद 2 दोषियों की ओर से डाली गई क्यूरेटिव पिटीशन पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) आज सुनवाई करेगा. फांसी की तारीख तय होने के बाद दोषी विनय शर्मा और मुकेश सिंह ने क्यूरेटिव पिटीशन दायर की थी. जस्टिस एनवी रमना, अरुण मिश्रा, आरएफ नरीमन, आर. भानुमति और अशोक भूषण की बेंच आज इस मामले पर सुनवाई करेगी. कोर्ट के फैसले के बाद आज पता चल जाएगा कि निर्भया के दोषियों को 22 जनवरी को फांसी दी जाएगी या फिर उन्हें कुछ और दिन की मोहलत मिल जाएगी.

निर्भया के दोषी विनय शर्मा के वकील एपी सिंह ने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में 9 जनवरी और मुकेश सिंह के वकील वृंदा ग्रोवर ने 10 जनवरी को क्यूरेटिव पिटीशन दायर की थी. पिटीशन में दोनों दोषियों की फांसी की सज़ा को उम्रकैद में बदलने की मांग की गई है. विनय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट सहित सभी अदालतों ने मीडिया और नेताओं के दबाव में आकर उन्हें दोषी ठहराया है. गरीब होने के कारण उसे मौत की सजा सुनाई गई है. विनय ने दलील दी कि जेसिका लाल मर्डर केस में दोषी मनु शर्मा ने नृशंस और अकारण हत्या की थी, लेकिन उसे सिर्फ उम्रकैद की सजा दी गई.

कब जारी हुआ डेथ वॉरंट?
इसके पहले पटियाला हाउस कोर्ट ने 7 जनवरी को निर्भया के चारों दोषियों अक्षय ठाकुर (31), पवन गुप्ता (25), मुकेश सिंह (32) और विनय शर्मा (26) के खिलाफ डेथ वॉरंट जारी किया था. अदालत ने सभी चारों दोषियों को 22 जनवरी को सुबह 7 बजे फांसी देने का आदेश दिया है.

NIRBHAYA

निर्भया के पिता और मां.

खारिज हो गई थी दोषियों को अंगदान के लिए मनाने वाली याचिका
वहीं, अदालत ने निर्भया के दोषियों को अंगदान के लिए मनाने वाली पिटीशन भी खारिज कर दी है. एक एनजीओ ने निर्भया के दोषियों से मिलने की अनुमति मांगी थी, ताकि उन्हें अंगदान के लिए मनाया जा सके. हालांकि, कोर्ट ने ये कहते हुए पिटीशन खारिज कर दी थी कि दोषियों के खिलाफ डेथ वॉरंट जारी हुआ है. ऐसे में उनसे परिवार का एक सदस्य और वकील के अलावा कोई नहीं मिल सकता.क्या है मामला?
16 दिसंबर 2012 को निर्भया गैंगरेप का शिकार हुई थी. 9 महीने बाद यानी सितंबर 2013 में निचली अदालत ने चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी. मार्च 2014 में हाईकोर्ट और मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा बरकरार रखी थी. इस बर्बर कांड के एक आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी, जबकि एक अन्य दोषी नाबालिग था और तीन साल तक सुधार गृह में रहने के बाद उसे रिहा कर दिया गया.

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First published: January 14, 2020, 7:52 AM IST





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