आकाश हसन
श्रीनगर.
 जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में सामान्य जनजीवन और इंफ्रास्टक्चर को नुकसान पहुंचाने के लिए आतंकी अब नए तरीके इजाद कर रहे हैं. आतंकियों ने यहां बिजली के टॉवर्स को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है. दक्षिण कश्मीर (South Shopian) के शोपियां (Shopian) जिले में ट्रक चलाने वालों पर एक हमले की जांच के दौरान सर्च ऑपरेशन में दौरान चित्रगाम (Chitragam) इलाके में पाया गया कि वहां 400 मेगावॉट के दो ट्रांसमिशन लाइन्स कटी हुई थीं.

सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की संयुक्त सेना हमले के बाद गांव से गुजर रही थी, जिसमें दो ट्रक चालक मारे गए थे और एक घायल हो गया था. उन्होंने पाया कि जिस जगह पर हमला हुआ था वहां से कुछ मीटर की दूरी पर एक ट्रांसमिशन टॉवर क्षतिग्रस्त था.

सर्च ऑपरेशन में शामिल एक पुलिस अधिकारी ने News18 को जानकारी दी कि ‘टॉवर को अलग करने के लिए गैस कटर का इस्तेमाल किया गया था.’सुरक्षा में मौजूद रहे अधिकारी
अधिकारी ने कहा कि ‘हमें कुछ लोगों को वहां रखना पड़ा जिन्होंने रात में टॉवर की निगरानी की अन्यथा यह ढह सकता था.’ जम्मू-कश्मीर पुलिस और नागरिक प्रशासन के अधिकारियों ने News18 को बताया कि ‘अगर टावर के ऊपर से गिरता तो यह विध्वंसकारी हो सकता था.’

राज्य के बिजली विभाग के एक अधिकारी ने कहा, ‘कश्मीर में बिजली के बुनियादी ढांचे में बड़ी गड़बड़ी के चलते घाटी के कई हिस्सों में बिजली, ब्लैकआउट होने के साथ ही जिन्दगियों को भी खतरा हो सकता है.’

400MW किशनपुर-लहरूर ट्रांसमिशन लाइन घाटी के कई हिस्सों में बिजली वितरित करती है और इसका रखरखाव पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड करती है.

आतंकियों की रणनीति से परेशान अधिकारी
घाटी में जिहादी समूहों की नई रणनीति से सुरक्षा अधिकारी परेशान हैं. एक अधिकारी ने बताया कि ‘आतंकवादियों ने गैस कटर से इस बड़े टावर के दो हिस्सों को काट लिया था. ऐसा लगता है कि बाद में गैस खत्म हो गई जिसके चलते बाकी हिस्सों को नहीं काट पाए.’

अधिकारियों का कहना है कि सौभाग्य से जिस टॉवर संख्या 348 को आतंकियों ने निशाना बनाया था, वह सस्पेंडेड टॉवर है. एक अधिकारी ने कहा कि ‘सस्पेडेंड टॉवर दो टावरों के बीच खड़ा है और अन्य टॉवर्स का सपोर्ट करता है.’

काउंटर इनसर्जेंसी टीमें इन आतंकी रणनीतियों का मुकाबला करने के लिए नए तरीके से सोच रही हैं.

यह एक बड़ी चुनौती होगी- पुलिस
एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि ‘यह एक बड़ी चुनौती है. कश्मीर में सैकड़ों ऐसे टावर हैं, जो आसानी से निशाना बनाए जा सकते हैं. हमने कश्मीर उग्रवाद के इतिहास में पहले ऐसा कुछ नहीं देखा था. इससे पहले मोबाइल फोन टावरों को निशाना बनाया गया हालांकि उससे कुछ ज्यादा नुकसान नहीं हुआ लेकिन बिजली के ट्रांसमिशन टॉवर कभी आतंकियों का निशाना नहीं थे.’

ट्रांसमिशन टॉवर उस जगह से कुछ ही मीटर की दूरी पर है जहां गुरुवार की शाम अंधाधुंध फायरिंग में आतंकवादियों द्वारा गोलीबारी किए जाने के बाद ट्रक चालकों की मौत हो गई थी और उनके सेब से लदे वाहनों को आग लगा दी गई थी.

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