Saturday, September 19, 2020
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Worshiping Is Completed By Chanting This Mantra – पूजा करते समय हो जाए भूल तो भगवान के समक्ष पढ़ें क्षमायाचना मंत्र


ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Updated Sat, 06 Jun 2020 08:21 AM IST

हम सभी किसी न किसी देवी देवता की पूजा अवश्य करते हैं। पूजा करते समय हमसे जाने अनजाने भूल हो ही जाती है।

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ऋषि मुनियों के समय से पूजा करते समय विशेष मंत्रों को पढ़ने का विधान रहा है। हम सभी किसी न किसी देवी देवता की पूजा अवश्य करते हैं। पूजा करते समय हमसे जाने अनजाने भूल हो ही जाती है। जिस तरह से शास्त्रों में प्रार्थना, स्नान, ध्यान और यहां तक की भोग लगाने के मंत्र भी बताए गए है, उसी तरह क्षमा याचना मंत्र भी बताए गए हैं। इससे हम पूजा में कि गई गलतियों और भूल चूक के लिए ईश्वर से क्षमा मांगते हैं।
चाहे पूजा पाठ हो या हमारा जीवन क्षमा का भाव सबसे बड़ा भाव माना गया है। पूजा के समय मांगी गई क्षमायाचना हमारे रोज के जीवन में की गई गलतियों के लिए भी होनी चाहिए। जब हम ईश्वर से अपनी त्रुटियों के लिए क्षमा मांग लेते है तब कहीं जाकर पूजा संपूर्ण मानी जाती है। अपने रोज के जीवन में भी हमें अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांग लेनी चाहिए। क्षमा का भाव हमारे अंदर के अंहकार को नष्ट कर देता है।  
क्षमायाचना का मंत्र और उसका अर्थ
 आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर।।मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन। यत्पूजितं मया देव। परिपूर्ण तदस्तु मे।।
 
इसका अर्थ है कि हे ईश्वर मैं आपका “आवाह्न” अर्थात् आपको बुलाना नहीं जानता हूं न विसर्जनम् अर्थात् न ही आपको विदा करना जानता हूं मुझे आपकी पूजा भी करनी नहीं आती है। कृपा करके मुझे क्षमा करें। न मुझे मंत्र का ज्ञान है न ही क्रिया का, मैं तो आपकी भक्ति करना भी नहीं जानता। यथा संभव पूजा कर रहा हूं, कृपा करके मेरी भूल को क्षमा कर दें और पूजा को पूर्णता प्रदान करें। मैं भक्त हूं मुझसे गलती हो सकती है, हे ईश्वर मुझे क्षमा कर दें। मेरे अहंकार को दूर कर दें। मैं आपकी शरण में हूं।
  

ऋषि मुनियों के समय से पूजा करते समय विशेष मंत्रों को पढ़ने का विधान रहा है। हम सभी किसी न किसी देवी देवता की पूजा अवश्य करते हैं। पूजा करते समय हमसे जाने अनजाने भूल हो ही जाती है। जिस तरह से शास्त्रों में प्रार्थना, स्नान, ध्यान और यहां तक की भोग लगाने के मंत्र भी बताए गए है, उसी तरह क्षमा याचना मंत्र भी बताए गए हैं। इससे हम पूजा में कि गई गलतियों और भूल चूक के लिए ईश्वर से क्षमा मांगते हैं।

प्रार्थना

चाहे पूजा पाठ हो या हमारा जीवन क्षमा का भाव सबसे बड़ा भाव माना गया है। पूजा के समय मांगी गई क्षमायाचना हमारे रोज के जीवन में की गई गलतियों के लिए भी होनी चाहिए। जब हम ईश्वर से अपनी त्रुटियों के लिए क्षमा मांग लेते है तब कहीं जाकर पूजा संपूर्ण मानी जाती है। अपने रोज के जीवन में भी हमें अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांग लेनी चाहिए। क्षमा का भाव हमारे अंदर के अंहकार को नष्ट कर देता है।  

puja

क्षमायाचना का मंत्र और उसका अर्थ
 आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर।।मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन। यत्पूजितं मया देव। परिपूर्ण तदस्तु मे।।
 
इसका अर्थ है कि हे ईश्वर मैं आपका “आवाह्न” अर्थात् आपको बुलाना नहीं जानता हूं न विसर्जनम् अर्थात् न ही आपको विदा करना जानता हूं मुझे आपकी पूजा भी करनी नहीं आती है। कृपा करके मुझे क्षमा करें। न मुझे मंत्र का ज्ञान है न ही क्रिया का, मैं तो आपकी भक्ति करना भी नहीं जानता। यथा संभव पूजा कर रहा हूं, कृपा करके मेरी भूल को क्षमा कर दें और पूजा को पूर्णता प्रदान करें। मैं भक्त हूं मुझसे गलती हो सकती है, हे ईश्वर मुझे क्षमा कर दें। मेरे अहंकार को दूर कर दें। मैं आपकी शरण में हूं।
  



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