Sunday, September 27, 2020
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Yogini Ekadashi 2020 Shubh Muhurat Puja Vidhi And Ekadashi Story – Yogini Ekadashi 2020: योगिनी एकादशी व्रत आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कथा


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Yogini ekadashi 2020: एकादशी व्रत का महत्व हिंदू धर्म में काफी होता है। एकादशी व्रत रखने में कई तरह के नियमों का पालन करना होता है। 17 जून को योगिनी एकादशी है। यह एकादशी व्रत हर माह में दो बार जरूर आती है। हिंदू पंचांग के अुनसार हर महीने के शुक्ल और कृष्ण पक्ष में एकादशी का व्रत रखा जाता है। साल में कुल 24 एकादशियां होती है लेकिन जिस वर्ष अधिमास होता है उस वर्ष 26 एकादशियां मनाई जाती है। एकादशी व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है। आइए जानते हैं आषाढ़ माह की योगिनी एकादशी का महत्व और पूजा विधि।योगिनी एकादशी Yogini ekadashi 2020शास्त्रों के अनुसार एकादशी की पूजा-व्रत करने वालों को और किसी पूजा की आवश्यकता नहीं पड़ती क्योंकि ये अपने भक्तों के सभी मनोरथों की पूर्ति कर उन्हें विष्णुलोक पहुंचाती हैं। योगिनी एकादशी का व्रत रखने से शरीर की समस्त व्याधियों को नष्ट कर सुदंर रूप, गुण और यश देने वाली है। योगिनी एकादशी प्राणियों को उनके सभी प्रकार के अपयश और चर्म रोगों से मुक्ति दिलाकर जीवन सफल बनाने में सहायक होती है। योगिनी एकादशी का व्रत 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर माना जाता है। योगिनी एकादशी व्रत के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने का भी विशेष महत्व है। भूलकर भी घर पर ना लगाएं बजरंगबली की ऐसी तस्वीरयोगिनी एकादशी पूजा विधि Yogini ekadashi 2020 puja vidhiयोगिनी एकादशी पर व्यक्ति को इस दिन व्रत रहकर भगवान विष्णु की मूर्ति को ‘ॐ नमोऽभगवते वासुदेवाय’ मंत्रका पाठ करते हुए स्नान आदि कराकर वस्त्र, चंदन, जनेऊ, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ऋतुफल, ताम्बूल, नारियल आदि अर्पित करके कर्पूर से आरती उतारनी चाहिए।एकादशी शुभ मुहूर्त Yogini ekadashi 2020 shubh muhuratयोगिनी एकादशी: 17 जून, 2020एकादशी तिथि का प्रारंभ: 16 जून, 2020 को सुबह 5 बजकर 40 मिनट पर एकादशी तिथि का समापन: 17 जून, 2020 को 4 बजकर 50 मिनट परसबेरे उठते ही भूलकर भी न देखें ये पांच चीजें, वरना पूरा दिन हो जाता है अशुभयोगिनी एकादशी व्रत कथा Yogini ekadashi 2020 storyपौराणिक कथा के अनुसार अलकापुरी में राजाधिराज महान शिवभक्त कुबेर के यहाँ हेममाली नाम वाल यक्ष रहता था। उसका कार्य नित्यप्रति भगवान शंकर के पूजनार्थ मानसरोवर से फूल लाना था। एक दिन जब पुष्प लेकर आ रहा था तो मार्ग से कामवासना एवं पत्नी ‘विशालाक्षी’ के मोह के कारण अपने घर चला गया और रतिक्रिया में लिप्त होने के कारण उसे शिव पूजा पुष्प के पुष्प पहुंचाने की बात याद नहीं रही। अधिक समय व्यतीत होने पर कुबेर क्रोधातुर होकर उसकी खोज के लिए अन्य यक्षों को भेजा। यक्ष उसे घर से दरबार में लाये, उसकी बात सुनकर क्रोधित कुबेर ने उसे कुष्टरोगी होने का शाप दे दिया। शाप से कोढ़ी होकर हेममाली इधर-उधर भटकता हुआ एक दिन दैवयोग से मार्कण्डेय ॠषि के आश्रम में जा पहुँचा और करुणभाव से अपनी व्यथा बताई। मार्कंडेय ॠषि ने अपने योगबल से उसके दुखी होने का कारण जान लिया और उसके सत्यभाषण से प्रसन्न होकर योगिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। हेममाली ने व्रत का आरम्भ किया। व्रत के प्रभाव से उनका कोढ़ समाप्त हो गया और वह दिव्य शरीर धारण कर स्वर्गलोक चला गया।

सार
17 जून को है योगिनी एकादशी
योगिनी एकादशी का व्रत 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर माना जाता है।

विस्तार
Yogini ekadashi 2020: एकादशी व्रत का महत्व हिंदू धर्म में काफी होता है। एकादशी व्रत रखने में कई तरह के नियमों का पालन करना होता है। 17 जून को योगिनी एकादशी है। यह एकादशी व्रत हर माह में दो बार जरूर आती है। हिंदू पंचांग के अुनसार हर महीने के शुक्ल और कृष्ण पक्ष में एकादशी का व्रत रखा जाता है। साल में कुल 24 एकादशियां होती है लेकिन जिस वर्ष अधिमास होता है उस वर्ष 26 एकादशियां मनाई जाती है। एकादशी व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है। आइए जानते हैं आषाढ़ माह की योगिनी एकादशी का महत्व और पूजा विधि।

योगिनी एकादशी Yogini ekadashi 2020

शास्त्रों के अनुसार एकादशी की पूजा-व्रत करने वालों को और किसी पूजा की आवश्यकता नहीं पड़ती क्योंकि ये अपने भक्तों के सभी मनोरथों की पूर्ति कर उन्हें विष्णुलोक पहुंचाती हैं। योगिनी एकादशी का व्रत रखने से शरीर की समस्त व्याधियों को नष्ट कर सुदंर रूप, गुण और यश देने वाली है। योगिनी एकादशी प्राणियों को उनके सभी प्रकार के अपयश और चर्म रोगों से मुक्ति दिलाकर जीवन सफल बनाने में सहायक होती है। योगिनी एकादशी का व्रत 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर माना जाता है। योगिनी एकादशी व्रत के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने का भी विशेष महत्व है। 

भूलकर भी घर पर ना लगाएं बजरंगबली की ऐसी तस्वीरयोगिनी एकादशी पूजा विधि Yogini ekadashi 2020 puja vidhiयोगिनी एकादशी पर व्यक्ति को इस दिन व्रत रहकर भगवान विष्णु की मूर्ति को ‘ॐ नमोऽभगवते वासुदेवाय’ मंत्रका पाठ करते हुए स्नान आदि कराकर वस्त्र, चंदन, जनेऊ, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ऋतुफल, ताम्बूल, नारियल आदि अर्पित करके कर्पूर से आरती उतारनी चाहिए।एकादशी शुभ मुहूर्त Yogini ekadashi 2020 shubh muhuratयोगिनी एकादशी: 17 जून, 2020एकादशी तिथि का प्रारंभ: 16 जून, 2020 को सुबह 5 बजकर 40 मिनट पर एकादशी तिथि का समापन: 17 जून, 2020 को 4 बजकर 50 मिनट परसबेरे उठते ही भूलकर भी न देखें ये पांच चीजें, वरना पूरा दिन हो जाता है अशुभयोगिनी एकादशी व्रत कथा Yogini ekadashi 2020 storyपौराणिक कथा के अनुसार अलकापुरी में राजाधिराज महान शिवभक्त कुबेर के यहाँ हेममाली नाम वाल यक्ष रहता था। उसका कार्य नित्यप्रति भगवान शंकर के पूजनार्थ मानसरोवर से फूल लाना था। एक दिन जब पुष्प लेकर आ रहा था तो मार्ग से कामवासना एवं पत्नी ‘विशालाक्षी’ के मोह के कारण अपने घर चला गया और रतिक्रिया में लिप्त होने के कारण उसे शिव पूजा पुष्प के पुष्प पहुंचाने की बात याद नहीं रही। अधिक समय व्यतीत होने पर कुबेर क्रोधातुर होकर उसकी खोज के लिए अन्य यक्षों को भेजा। यक्ष उसे घर से दरबार में लाये, उसकी बात सुनकर क्रोधित कुबेर ने उसे कुष्टरोगी होने का शाप दे दिया। शाप से कोढ़ी होकर हेममाली इधर-उधर भटकता हुआ एक दिन दैवयोग से मार्कण्डेय ॠषि के आश्रम में जा पहुँचा और करुणभाव से अपनी व्यथा बताई। मार्कंडेय ॠषि ने अपने योगबल से उसके दुखी होने का कारण जान लिया और उसके सत्यभाषण से प्रसन्न होकर योगिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। हेममाली ने व्रत का आरम्भ किया। व्रत के प्रभाव से उनका कोढ़ समाप्त हो गया और वह दिव्य शरीर धारण कर स्वर्गलोक चला गया।



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